गुरुवार, 22 जनवरी 2015

मप्र के राज्यपाल रामनरेश यादव से पत्रकार प्रवीण श्रीवास्तव व राजकुमार सोनी की सौजन्य भेंट



भोपाल। मिशन फॉर मदर के संचालक प्रवीण श्रीवास्तव व पत्रकार राजकुमार सोनी ने 22 जनवरी को दोपहर 12 बजे मप्र के राज्यपाल रामनरेश यादव से राजभवन में सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर राज्यपाल को मां कविता संग्रह व तस्वीर भेंट की गई। राज्यपाल रामनरेश यादव ने मिशन की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए मिशन के उज्जवल भविष्य की कामना की। राज्यपाल ने अपने माता-पिता के रोच संस्मरण भी सुनाए।




शुक्रवार, 28 मार्च 2014

सूर्य व शुक्र बनवाएंगे मोदी को पीएम





प्रधानमंत्री पद पर पहुंचने के लिए महिला शक्ति होगी मददगार

- राजकुमार सोनी

मई में गुजरात के सीएम नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री पद की शपथ लेकर सत्तासीन होंगे। मुख्यमंत्री से प्रधानमंत्री पद तक पहुंचाने में किसी खास महिला का योगदान होगा। ऐसा योग सूर्य व शुक्र ग्रह से बन रहा है। भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री पद के दावेदार नरेंद्र मोदी के ज्योतिषीय आकलन दृष्टिकोण से मप्र के प्रमुख भविष्यवक्ताओं व ज्योतिषियों से अबकी बार किसकी सरकार और कौन बनेगा प्रधानमंत्री के बारे में बात की। इन प्रकांड विद्वानों का कहना है कि लोकसभा चुनाव में भाजपा को सर्वाधिक सीटें हासिल होंगी और एनडीए की सरकार के मुखिया इस बार लालकृष्ण आडवाणी की बजाय गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी होंगे। लोकसभा में एनडीए को 250 से 275 सीटें मिलेंगी जबकि यूपीए को 80 से 110 सीटें ही मिल पाएंगी।

इंदौर के लालकिताब विशेषज्ञ एवं भविष्यवक्ता पं. आशीष शुक्ला के अनुसार शनि शत्रु राशि में होकर चतुर्थ पर पूर्ण दृष्टि रखने से जनता के बीच प्रसिद्ध बना रहा है। भारत की अधिकांश जनता भावी प्रधानमंत्री के रूप में देख रही है। दशमेश बुध एकादशेश के साथ है। दशमेश सूर्य, केतु से भी युक्त है। सूर्य का महादशा में लग्नेश मंगल का अन्तर चल रहा है जो दशमेश होकर लाभ भाव में व मंगल स्वराशि का होकर लग्न में है। यह समय भाजपा को उत्थान की ओर लेजाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बन जाएंगे। पं. शुक्ल ने कहा कि लालकृष्ण आडवाणी का योग प्रधानमंत्री बनने का नहीं है।
सागर के ज्योतिषाचार्य एवं अंक शास्त्री पं. पीएन भट्ट के अनुसार नरेन्द्र मोदी की जन्म राशि वृश्चिक है। शनि की साढ़े साती का प्रथम चरण चल रहा है। राजभवन में विराजे शुक्र में पराक्रमेश शनि की अन्तर्दशा में गुजरात के मुख्यमंत्री बने। 02.12.2005 को शुक्र की महादशा के बाद राज्येश सूर्य की महादशा जो 03.02.2011 तक चली। तत्पश्चात् 03.02.2011 से भाग्येश चन्द्र की महादशा का शुभारम्भ हुआ। ज्योतिष ग्रंथों में वर्णित है कि एक तो भाग्येश की महादशा जीवन में आती नहीं है और यदि आ जाए तो जातक रंक से राजा तथा राजा से महाराजा बनता है।  मोदी भाग्येश की महादशा में मुख्यमंत्री से प्रधानमंत्री बन सकते हैं, किन्तु चन्द्रमा में राहु की अन्र्तदशा ग्रहण योग बना रही है तथा 20 अप्रैल से 20 जुलाई 2014 के मध्य व्ययेश शुक्र की प्रत्यन्तर दशा कहीं प्रधानमंत्री पद तक पहुंचने के प्रबल योग को ण न कर दें? यद्यपि योगनी की महादशा संकटा में सिद्धा की अन्तर्दशा तथा वर्ष कुण्डली में वर्ष लग्न जन्म लग्न का मारक भवन (द्वितीय) होते हुए भी मुंथा पराक्रम भवन में बैठी है तथा मुंथेश शनि अपनी उच्च राशि का होकर लाभ भवन में विराजमान है। जो अपनी तेजस्वीयता से जातक को 7 रेसकोर्स तक पहुंचा सकता है। किन्तु एक अवरोध फिर भी शेष है और वह है सर्वाष्टक वर्ग के राज्य भवन में लालकृष्ण आडवानी और राहुल गांधी की तुलना में कम शुभ अंक अर्थात् 27.  साथ ही ''मूसल योग'' जातक को दुराग्रही बना रहा है तथा केमद्रुम योग, जो चन्द्रमा के द्वितीय और द्वादश में कोई ग्रह न होने के कारण बन रहा है। उसका फल भी शुभ कर्मों के फल प्राप्ति में बाधा। वर्तमान में भाग्येश चन्द्रमा की महादशा चल रही है, जो दिल्ली के तख्ते ताऊस पर  मोदी की ताजपोशी कर तो सकती है किन्तु केमद्रुम योग तथा ग्रहण योग इसमें संशय व्यक्त करता नजर आ रहा है? 
ग्वालियर के भविष्यवक्ता पं. एचसी जैन ने बताया कि नरेंद्र मोदी की कुंडली में केन्द्र का स्वामी केन्द्र में होकर त्रिकोण के साथ लक्ष्मीनारायण योग बना रहा है। यह योग कर्म क्षेत्र को धनवान बनाने में समर्थ है। यही कारण है कि नरेंद्र मोदी की ख्याति विरोध के बावजूद लगातार बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि लोकसभा में एनडीए को 250 से 275 सीटें मिलेंगी जबकि यूपीए को 80 से 110 सीटें ही मिल पाएंगी। जैन ने बताया कि मोदी को प्रधानमंत्री बनवाने में किसी खास महिला का विशेष योगदान रहेगा।


 


जन्मकुंडली : नरेन्द्र मोदी
जन्म दिनांक : 17 सितम्बर, 1950
जन्म समय : 11 बजे प्रात:
जन्म स्थान: मेहसाना (गुजरात)   

रविवार, 8 दिसंबर 2013

जन जन के शिवराज सिंह चौहान



मध्य प्रदेश में लगातार तीसरी बार विधानसभा चुनाव जीतकर सरकार बनाने जा रही बीजेपी के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को एक सफल प्रशासक के साथ ही बेहद विनम्र और मिलनसार राजनेता के रूप में पहचाना जाता है.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से 1972 में संपर्क में आए चौहान ने 1975 में आपातकाल के आंदोलन में भाग लिया और भोपाल जेल में निरूद्ध रहे. भाजयुमो के प्रांतीय पदों पर रहते हुए उन्होंने विभिन्न छात्र आंदोलनों में भी हिस्सा लिया.

शिवराज की हैट्रिक
उमा भारती और बाबूलाल गौर के बाद प्रदेश के मुख्यमंत्री के बतौर 29 नवंबर 2005 को पहली बार शपथ लेने वाले चौहान यहां लगातार दूसरी बार 2008 में भी मुख्यमंत्री रहे और पार्टी की घोषणा के अनुसार चौदहवीं विधानसभा में बहुमत पाकर सरकार में आने पर वह लगातार तीसरी बार इस पद की शपथ लेने जा रहे हैं.

1990 में पहली बार बने विधायक
चौहान वर्ष 1990 में पहली बार बुदनी विधानसभा क्षेत्र से विधायक बने थे. इसके बाद 1991 में अटल बिहारी वाजपेयी ने दो सीटों पर चुनाव लड़ा था जिसमें से उन्होंने लखनऊ सीट को रखा था और विदिशा से इस्तीफा दे दिया था. विदिशा में पार्टी ने शिवराज को प्रत्याशी बनाया और वह वहां से पहली बार सांसद बने.

सीहोर जिले में हुआ जन्म
सीहोर जिले के जैत गांव में पांच मार्च 1959 को जन्मे 54 वर्षीय चौहान की संगीत, अध्यात्म, साहित्य एवं घूमने-फिरने में विशेष रूचि है. उनकी पत्नी साधना सिंह हैं और उनके दो पुत्र हैं. उनकी शैक्षणिक योग्यता कला संकाय से स्नातकोत्तर है.

कई अहम समितियों के सदस्य भी रहे
चौहान 1991-92 में अखिल भारतीय केसरिया वाहिनी के संयोजक और 1992 में अखिल भारतीय जनता युवा मोर्चा के महासचिव बने. वर्ष 1992 से 1994 तक बीजेपी के प्रदेश महासचिव नियुक्त होने के साथ ही वह वर्ष 1992 से 1996 तक मानव संसाधन विकास मंत्रालय की परामर्शदात्री समिति, 1993 से 1996 तक श्रम और कल्याण समिति तथा 1994 से 1996 तक हिन्दी सलाहकार समिति के सदस्य रहे. ग्यारहवीं लोकसभा में वर्ष 1996 में वह विदिशा संसदीय क्षेत्र से दोबारा सांसद चुने गये. सांसद के रूप में 1996-97 में वह नगरीय एवं ग्रामीण विकास समिति, मानव संसाधन विकास विभाग की परामर्शदात्री समिति तथा नगरीय एवं ग्रामीण विकास समिति के सदस्य रहे.

विदिशा में शिवराज का जबरदस्त जनसमर्थन
वर्ष 1998 में वह विदिशा संसदीय क्षेत्र से ही तीसरी बार बारहवीं लोकसभा के सदस्य चुने गये. वह 1998-99 में प्राक्कलन समिति के सदस्य रहे. 1999 में वह विदिशा से लगातार चौथी बार तेरहवीं लोकसभा के लिए एक बार फिर चुने गए और 1999-2000 में कृषि समिति के सदस्य तथा 1999-2001 में सार्वजनिक उपक्रम समिति के सदस्य रहे.

पार्टी की युवा इकाई को किया मजबूत
साल 2000 से 2003 तक भाजयुमो के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने पार्टी की युवा इकाई को मजबूत करने के लिए मेहनत की. इस दौरान वे सदन समिति (लोकसभा) के अध्यक्ष और बीजेपी के राष्ट्रीय सचिव भी रहे. वह 2000 से 2004 तक संचार मंत्रालय की परामर्शदात्री समिति के सदस्य रहने के साथ ही पांचवीं बार विदिशा से चौदहवीं लोकसभा के सदस्य निर्वाचित हुए.

वह वर्ष 2004 में कृषि समिति, लाभ के पदों के विषय में गठित संयुक्त समिति के सदस्य, बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव, बीजेपी संसदीय बोर्ड के सचिव, केन्द्रीय चुनाव समिति के सचिव और नैतिकता विषय पर गठित समिति के सदस्य और लोकसभा की आवास समिति के अध्यक्ष रहे.

2005 में बने सीएम
वर्ष 2005 में चौहान मध्यप्रदेश बीजेपी के अध्यक्ष नियुक्त किए गए और उन्हें 29 नवंबर 2005 को उमा भारती और बाबूलाल गौर के बाद पहली बार प्रदेश के मुख्यमंत्री की कमान सौंपी गई.

विकास और स्वच्छ छवि के लिए लोकप्रिय

प्रदेश की तेरहवीं विधानसभा के निर्वाचन में चौहान ने बीजेपी के स्टार प्रचारक की भूमिका का बखूबी निर्वहन कर पार्टी को लगातार दूसरी बार विजय दिलाई. उन्हें 10 दिसंबर 2008 को पार्टी के 143 सदस्यीय विधायक दल ने सर्वसम्मति से नेता चुना और उन्होंने 12 दिसंबर 2008 को भोपाल के जम्बूरी मैदान में आयोजित सार्वजनिक समारोह में मुख्यमंत्री पद और गोपनीयता की शपथ ग्रहण की. विकास और स्वच्छ छवि के लिए मध्य प्रदेश की जनता में लोकप्रिय शिवराज ने लगातार तीसरी बार बीजेपी को जीत दिलाई है.

बुधवार, 27 नवंबर 2013

भविष्यवाणी : भाजपा को 117 से 125 सीटें मिलेंगी




मप्र में सूर्य लगवाएगा भाजपा की हैट्रिक
कांग्रेस को मिलेंगी 85 से 100 सीटें
- राजू स्वर्णकार
भोपाल।
सूर्य के तुला राशि से वृश्चिक राशि में आने से 25 नवंबर को हुए जबरदस्त मतदान की वजह से प्रदेश में पहली बार भारतीय जनता पार्टी हैट्रिक लगाकर एक नया इतिहास रचने जा रही है। 50 वर्षों के इतिहास में कोई भी सरकार मप्र में 10 साल से अधिक कार्यकाल पूरा नहीं कर पाई लेकिन इस बार यह इतिहास पहली बार लिखा जाएगा। वहीं कांग्रेस में एक जुटता एवं केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को कमान सौंपे जाने से इस बार कांग्रेस की सीटें बढ़कर 85 से 100 तक पहुंच जाएंगी।
लालकिताब विशेषज्ञ एवं प्रसिद्ध भविष्य वक्ता पंडित आशीष शुक्ल, इंदौर  ने दावा किया कि चंद्र-मंगल की युति व ग्रहों के राजा सूर्य के तुला राशि से वृश्चिक राशि में प्रवेश करने से भारतीय जनता पार्टी को मतदाताओं का सीधा लाभ मिल रहा है। 16 नवंबर को सूर्य के राशि परिवर्तन से भाजपा को 117 से 125 सीटें प्राप्त कर मध्यप्रदेश में तीसरी बार सरकार बनाएगी। उन्होंने कहा कि 10 साल से वनबास काट रही कांग्रेस पार्टी को भी इस बार 2008 में मिली 71 सीटों की तुलना में 20 से 30 सीटों का फायदा मिलेगा। कांग्रेस को इस बार 90 से 100 सीटें मिलेंगी।
चैतन्य भविष्य जिज्ञासा शोध संस्थान भोपाल के संचालक आचार्य पंडित राज के अनुसार विधानसभा में इस बार कांग्रेस-भाजपा में कांटे के  मुकाबले के तहत भारतीय जनता पार्टी अंतत: सरकार बनाने में कामयाब हो जाएगी। चंद्र-मंगल व सूर्य के शुभ प्रभाव से सत्तादल भाजपा को अच्छा लाभ मिलेगा।
ज्योतिषाचार्य पंडित धर्मेंन्द्र का कहना है कि यही मतदान अगर 25 नवंबर की तुलना में 15 नवंबर के आसपास होता तो कांग्रेस को 140 से 145 सीटें मिल सकती थीं। क्योंकि तुला राशि का सूर्य सत्तासीन सरकार के लिए लाभदायक नहीं होता। चूंकि सूर्य के वृश्चिक राशि में प्रवेश होने से इसका लाभ भाजपा सरकार को मिलेगा। भाजपा को इस बार 120 से 125 सीटें मिलेगी जबकि कांग्रेस 85 से 95 सीटों तक सिमट कर रह जाएगी।
ज्योतिषाचार्य पंडित विष्णु राजौरिया के अनुसार चंद्र, मंगल व सूर्य के प्रबल योग से सत्तासीन भाजपा सरकार तीसरी बार सरकार बनाकर आम लोगों के लिए जनकल्याणकारी योजनाएं बनाएगी। उन्होंने कहा कि  हालांकि कांग्रेस इस बार विपक्ष की भूमिका आक्रमक रूप में अपनाएगी जिससे नई सरकार को कई बार दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। लेकिन अंततोगत्वा सरकार अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा करेगी।

शनिवार, 17 अगस्त 2013

आखिरकार, मेरा कसूर क्या है : राघवजी



जेल में 36 दिन काटकर लौटे पूर्व वित्त मंत्री राघवजी ने रोते हुए कहा

राघवजी से वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद भारद्वाज की बातचीत


भोपाल। चार इमली के बी-19 बंगले की 36 दिन बाद उदासी टूटी है। राघवजी भाई सांखला जेल से घर लौट आए हैं। 14 अगस्त को बी-19 में 70 कारों का काफिला देखा। राघवजी कहते हैं - मैं तो सोचता था जेल के बाहर चार लोग भी लेने नहीं आएंगे। पर बाहर 400 लोग खड़े थे। मेरी इज्जत तार-तार थी। पर देख कर लगा कि मुझे इज्जत देने वाले अभी हैं। 14 की दोपहर जब वे जेल से लौटे तो पैरों में साधारण चप्पल थी। सफेद रंग का पायजामा और क्रीम कलर का गंदा सा कुर्ता। वे जिस कमरे में, जिस कुर्सी पर बैठे थे, उसके ठीक ऊपर भेड़ाघाट के जलप्रपात का फोटो लगा था। राघवजी शायद ये नहीं सोच पाए कि राजनीति भी जलप्रपात की तरह होती है। झरने, ऊपर से नीचे की तरफ ही बहा करते हैं। बंगले पर मौजूद 250-300 समर्थकों में केसरिया पेठा बांटा जा रहा था। पर शायद ही किसी ने मुंह मीठा किया हो। ट्रे में चाय के गिलास थे। बिस्कुट थे। पर लौट रहे थे। राघवजी की बेटी ज्योति सबको कुशलक्षेम दे रही थीं। पत्नी हीरा बेन अंदर के कमरे में बैठी थीं। दो दिन बाद यानी शुक्रवार को पिता-पुत्री की आंख में जैसे बाढ़ आ गई थी। ज्योति ने कहा- हम गले तक भर चुके हैं। टूट चुके हैं। ब्लैकमेलिंग की राजनीति के शिकार हुए हैं। इधर, राघवजी भी फबक रहे थे-सरकार ने अच्छा नहीं किया। वो मीसाबंदी के 19 महीने अच्छे थे। ये 36 दिन तो दुख और अंधेरे से भरे थे। मेरा कसूर आखिर क्या था? मैंने तो कभी शिवराज जी से प्रतिस्पर्धा नहीं की। सीएम बनने की कभी कोई महत्वाकांक्षा नहीं पाली। साधना सिंह के विदिशा से लडऩे की बात आई तो मैंने खुद चुनाव लडऩे से मना कर दिया था। जब उमा भारती हटीं तो लोगों ने कहा कि सीएम के लिए मेरी प्रबल दावेदारी है। पर मैंने कहा कि मैं परफॉर्म नहीं कर पाऊंगा। बाद में उमा भारती ने भी मुझसे कहा था कि उन्होंने मेरा नाम आगे न बढ़ाकर गलती की थी। राघवजी बार-बार भर आती आंखों को पोंछते हुए सवाल करते हैं- मेरे साथ दो और आरोपी बनाए गए थे। पर मुझे 36 घंटे में गिरफ्तार कर लिया पर उनको 36 दिन बाद भी पुलिस गिरफ्तार नहीं कर पाई। आखिरकार, मेरा कसूर क्या है?


इस्तीफे वाले दिन और जेल जाने तक की क्या कहानी है?
 सुबह शिवराज जी का फोन आया था। वे कह रहे थे कि पुलिस में एक शिकायत हुई है। हमारा और पार्टी का मानना है कि आप इस्तीफा दे दें। मैंने बिना कोई सवाल किए। एक कोरे कागज पर तीन लाइनें लिखीं। और फैक्स करवा दिया। थोड़ी देर बाद तोमर जी का फोन आया। उन्होंने कहा कि हमारा भी मत है कि आप इस्तीफा दे दें। इसके बाद मैं अपने जन्मदिन के कार्यक्रमों में व्यस्त हो गया। मैं विदिशा चला गया। वहीं पत्रकारों ने बताया कि मेरा निलंबन नहीं निष्कासन हो गया है। मैं हैरान था। ये कैसा सुलूक?

गिरफ्तारी के पहले क्या हुआ?
 एक एप्लीकेशन थाने में जमा होती है। एफआईआर होती है। और फिर ताबड़तोड़ गिरफ्तारी के लिए कोशिशें शुरू हो जाती हैं। मैं विदिशा से वापस आया। मेरी पत्नी भी आईं। मैं अपने दोस्त के घर खाना खाने गया। फिर कोहेफिजा के फ्लैट पर गया। मेरी पत्नी को मंदिर में जाप करना था। उसने जाप किया और मेरे पास आ गईं। दूसरी रात 1 बजे पुलिस ने मेरे फ्लैट के दरवाजे पर ताला जड़ दिया। हम दरवाजा लगातार खटखटाते रहे। पर आसपास इतनी दहशत थी कि किसी ने हमारी आवाज नहीं सुनी। बाहर लगभग 400 पुलिस वाले थे। पूरी छावनी बनाई हुई थी। पुलिस कहती है कि मेरी लोकेशन जबलपुर थी। पर मैं जबलपुर गया ही नहीं। यदि मैं फ्लैट पर ताला लगाता तो चाबी मेरे पास होती। चाबी मेरे पास आती कैसे? दूसरे दिन सुबह 1 बजे पुलिस ने मेरे फ्लैट का ताला तोड़ा और कहा थाने चलना है। मुझे गाड़ी में ऐसे घेर कर बैठाया गया जैसे मैं कोई आतंकवादी हूं। भाग जाऊंगा। मैं भूखा था। फ्लैट पर हमारे पास खाने के लिए कुछ नहीं था। मुझे ले जाने से पहले मेरी भांजी के फ्लैट में घुसकर सारे ताले तोड़े गए। उनको धमकाया गया कि उठा ले जाएंगे। 3 दिन के भीतर मुझे गिरफ्तार कर लिया गया। ये तब हुआ जब सीडी की जांच रिपोर्ट नहीं आई। जांच रिपोर्ट तो अब तक नहीं आई। बावजूद, मुझे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। थाने में भी मेरे साथ कोई भद्रता नहीं की गई। मैंने थाने में किसी को नहीं धमकाया। किसी को नहीं कहा कि देख लूंगा?

गिरफ्तारी से पहले तोमर से कोई बात हुई?

हां, शाम को बात हुई थी। उन्होंने कहा था कि हम आपको बचा लेंगे। आपकी मदद करेंगे। पर मैंने कहा था कि मुझे नहीं लगता कि सरकार मुझे बचाएगी। क्योंकि, मैंने फोन पर ही उनसे आशंका जताई कि शासन का व्यवहार सहानुभूति के विपरीत है। लगता नहीं है कि ये व्यवहार उस शख्स से किया जा रहा है जो 10 साल तक प्रदेश का वित्तमंत्री रहा है।

यानी आप सीधे-सीधे टारगेट किए गए?
हां, ये कुछ भी हो सकता है। कोई पैसे का खेल, या फिर कोई राजनीतिक षडयंत्र का खेल। पर जिस ढ़ंग से हुआ, वह ढ़ंग ठीक नहीं है। कैलाश जोशी जी को मैंने बताया था। उन्होंने कहा था कि पार्टी एक्शन लेना चाहती है। सरकार का निर्णय है। मैंने कहा कि पार्टी की ही सरकार है। पार्टी ही सोचे। मेरा मामला पहले अनुशासन समिति को भेजा जाए। जांच हो फिर निलंबन हो। और निष्कासन हो। सीधे निष्कासन तो पार्टी संविधान के खिलाफ है। मैं इससे सहमत नहीं हूं। जोशी जी ने कहा कि मैं बात करता हूं। पर उनका फोन नहीं आया।

जेल में भी क्या आप से बुरा बर्ताव किया गया?

हां, मेरे समर्थकों को बड़ी मुश्किल से मुझसे मिलने दिया गया। मैं जिसके नाम को हां कह देता था, उसको भेजा नहीं जाता था। मैं जेल अफसरों को अपनी सेहत के बारे में नोट कराता था पर किसी ने भी इसे गंभीरता से नहीं लिया गया। मुझे एक बार हमीदिया और दो बार भोपाल मेमोरियल ले जाया गया। पर दोनों ही जगह गंभीरता से चेकअप नहीं हुआ। मुझे पहले से ही बीपी की शिकायत थी। शुगर 279 पर पहुंच गई थी। बैरक में मुझे चक्कर आने लगे थे। दिन में तीन-तीन बार चक्कर आते थे। एक बार मैं सोने वाले चबूतरे पर गिर भी गया था। मुझे लगा कि मेरी पसली टूट गई है। पर ऐसा नहीं हुआ। लेकिन मेरे पैरों में सूजन आ गई थी। ये किडनी से रिलेटेड प्रॉब्लम थी। किसी ने ध्यान नहीं दिया। अब जेल से आकर सारी जांचें करवा रहा हूं।

फिर ये 36 दिन कैसे गुजारे?
 मैंने अपने को कंपोज कर लिया था। किससे बात करता। अपने सुख-दुख किसे बताता। वहां कोई मेरा अपना नहीं था। शुरू के दो दिनों में रात भर नहीं सो पाया। फिर सोचा ऐसा रहा तो मर जाऊंगा। मैंने सुबह योग शुरू किया। पूजा शुरू की। पढऩा शुरू किया। वीर सावरकर को पढ़ा। जसवंत सिंह की जिन्ना पर किताब को पढ़ा। प्रेमचंद की कहानियां पढ़ीं। वृंदावन लाल वर्मा का उपन्यास कचनार पढ़ा। पहले बैरक में टीवी नहीं था। फिर टीवी आया। उसमें सिर्फ दूरदर्शन ही आता था। शुरू में मुझे मेरी छपी खबरों को काट कर अखबार दिए गए । पर तीन दिन बाद साबुत अखबार आने लगे। मैंने जो पढ़ा उसकी नोटिंग एक डायरी में की है। पर यह जेल डायरी नहीं है। मेरा वजन 4-5 किलो कम हो गया है।

जेल से लौटने के बाद सरकार की तरफ से किसी ने बात की? कोई मिलने आया?

गृहमंत्री उमाशंकर गुप्ता को मैंने ही फोन किया था। वे खुद मिलने बंगले पर आ गए। उन्होंने भी पुलिस कार्रवाई को सही नहीं बताया। मैंने उनसे कोई शिकायत नहीं की। मैंने तोमर से समय लेने की कोशिश की। कैलाश विजयवर्गीय को भी फोन लगाया। पर वे मुंबई में हैं। मुख्यमंत्री से कोई बात नहीं हुई। वे बुलाएंगे। तो चला जाऊंगा। अपनी तरफ से कोई बात नहीं करूंगा। जो कहना होगा। पार्टी के सामने कहूंगा। विदिशा के लोग मेरे साथ हैं। उन्होंने मुझे नैतिक बल दिया है। वे आरोपों से प्रभावित नहीं हैं। गिरफ्तारी के बाद मैंने कहा था कि पहले मेरा इरादा चुनाव लडऩे का नहीं था। पर यदि पार्टी चाहेगी तो अब मैं चुनाव जरूर लड़ंूगा। मैं मतदाताओं से भी क्लीन चिट लेना चाहूंगा।

लेकिन पार्टी ने टिकट नहीं दिया तो ? किसी और पार्टी में जाएंगे? क्या पार्टी से बगावत करेंगे?
 नहीं, यह मैं सोच भी नहीं सकता। 55 साल से पार्टी की सेवा कर रहा हूं। पार्टी को जमाने में मेरा भी थोड़ा-बहुत योगदान है। फैसला पार्टी को करना है। जब पार्टी फैसला करेगी तो मैं अगला कदम उठाऊंगा।

पार्टी ने तो विजय शाह को भी माफ कर दिया है?
ये फैसला पार्टी को करना है।
चुनाव नजदीक हैं। पार्टी यदि गलत फैसले करती है तो क्या उसे नुकसान उठाना पड़ेगा?
यदि गलत लोगों पर दांव लगाया जाएगा तो उसके दुष्परिणाम तो भुगतने ही पड़ेंगे। मैं जो भी फैसला करता हूं अपने साथियों के परामर्श के बाद ही करता हूं।

आपको अटल जी और आड़वाणी जी पसंद करते हैं, कहीं इस कारण से तो आप टारगेट नहीं किए गए?
मुझे नहीं मालूम। वित्तमंत्री रहते कॉरपोरेट लॉबी मुझसे नाखुश थी। मेरे विरोध के कारण ही जीएसटी लागू नहीं हो पाया। फिर कुछ लोग मेरी सीट पर भी निगाह गड़ाए बैठे थे। कुछ लोग वित्तमंत्री भी बनना चाहते थे। हो सकता है वही लोग इस साजिश के पीछे हों।

क्या मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की भी कोई भूमिका देखते हैं?
शिवराज जी जब 16 वर्ष के थे। तब मुझे जेल में मिले थे। मैंने उनको आगे बढ़ाने के लिए जो हो सकता था किया। मैंने सोचा टेलेंट है। एक समाज से लड़का आ रहा है। इसे आगे बढ़ाओ। मैंने ही उनसे कहा था कि बुधनी से लड़ो। मैंने ही उनको टिकट दिलवाने में मदद की। मेरी कोई महत्वाकांक्षा नहीं है। मंै शिवराज जी के लिए कोई चुनौती नहीं हूं। मैंने खुद होकर न कोई टिकट मांगा और न कोई क्षेत्र। सीहोर की बात आई तो मुझे शमशाबाद भेजा गया। शमशाबाद की बात आई तो मुझे विदिशा भेजा गया। राज्यसभा भी मैं ठाकरे जी के कहने पर गया। पार्टी के सामने मैंने अपनी कोई इच्छा नहीं रखी। आज भी कोई इच्छा नहीं है। पर दुख इस बात का है कि पार्टी ने मुझे सामान्य कार्यकर्ता की हैसियत बरकरार नहीं रखने दी। सरकार ने मेरी जमानत तक का विरोध किया। मेरे साथ जो दो प्रभावहीन आरोपी बनाए गए थे, उनको अब तक छोड़ा हुआ है। जिसने मुझ पर आरोप लगाया। वह मेरे पास तीन साल से था। तीन साल तक वो क्यों खामोश रहा। मेरे बंगले से 2 महीने पहले ही गया। 2 महीने तक चुप रहने के लिए उसने किसने रोका था? मुझे इसी बात का दुख है। न सरकार ने अच्छा किया  और न पार्टी ने?

आप गुजरात के कच्छी समाज से आते हैं। क्या नरेंद्र मोदी के सामने भी अपना पक्ष रखेंगे?

नहीं, इसकी जरूरत नहीं है। हां, मेरी गिरफ्तारी के बाद कच्छ के सांसद और विधायक जरूर सक्रिय हुए थे। उन्होंने मेरे प्रति संवेदना जताई थी। मैं तो सिर्फ तोमर जी के सामने अपना पक्ष रखूंगा। मिलने का समय मांग रहा हूं। समय देंगे तो पार्टी कार्यालय जाऊंगा। मैं अभी किसी भी सार्वजनिक समारोह में शिरकत नहीं कर रहा हूं। विदिशा में कार्यकर्ता स्वागत करने वाले थे। पर मैंने मना किया। पहले पार्टी का फैसला आ जाए। तो कुछ किया जाए।

मंगलवार, 6 अगस्त 2013

जिन्दगी की कहानी , भविष्यवेत्ताओं की जुबानी



मानव मन बड़ा जिज्ञासु है। भविष्य में उसका क्या होने वाला है? कल की बात आज जान लेने के लिए वह आतुर रहा है - अनादिकाल से।  ज्योतिष शास्त्र का विकास अपनी इसी मनोवैज्ञानिक अवधारणा को पूर्ण करने के उद्देश्य से पल्लवित और पुष्पित होता आ रहा है।  तथाकथित कट्टर से कट्टर कर्मवादी के मन में भी अपने भविष्य को जानने की प्रबल जिज्ञासा बनी रहती है।  मैरी लेनोर्मा को भविष्यदृष्टाओं की सम्राज्ञी कहा जाता है। वह हस्तरेखा, अंक ज्योतिष, नक्षत्र विज्ञान और ताश के पत्तों से भाग्य व भविष्य बताया करती। एक ऐसे दौर में उसने नाम कमाया, जब भविष्यवाणी करना राजद्रोह के समान था, मगर वह कभी नहीं घबरायी, न विरोध से और न वक्त से। उसने एक अखबार (Sourenirs Prophetiques) निकलना शुरू किया, जो ज्योतिष और भविष्यवाणियों के बारे में था। आइये जानते हैं आज की आवरण कथा में।



ब्रेहन का संत: कैनेथ मैकेंजी
पुराने अधिकांश ज्योतिषियों की भविष्यवाणी प्राय: पहेलीनुमा उलझी भाषा में हैं। ब्रेहन के संत की भविष्यवाणियों की सबसे बड़ी विशेषता है कि वे व्यक्तियों, परिवारों राजघरानों, शहरों, नदियों और अविष्कारों के बारे में इतनी सरल और स्पष्ट भाषा में सब कुछ बताती हैं कि दिमाग पर जोर नहीं डालना पड़ता। उसने जो कुछ भी कहा, एक दम सही निकला। आईए! देखें उनकी कुछ भविष्यवाणियॉ :-
1. ''दुर्गम पहाड़ों की ऊंची चढ़ाईयां एकदम आसान हो जायेंगी। पूरा रास्ता रिबन जैसा होगा और मशीन से चलने वाली बग्घियां उन घाटियों से होकर गुजरेगी, जिनके किनारे धातु के पुलों द्वारा जोड़े जायेंगे।''
2. ''घरों तक पहुंचेगा पीने का पानी और खाना बनाने की बहती हुई आग।''
3. ''आपस में जुड़ी बग्घियों की डोर लोहे की पटरी पर एक जगह से दूसरी जगह को लायें-ले जायेंगी। उसे जानवर नहीं इंसानों का दिमाग चलायेगा।''
4. ''महासागरों के नीचे भी, गहराई में चलेंगे पोत, जिनके आग के तीर दुश्मन पर हमला करेंगे।''
ऐसी स्पष्ट भविष्यवाणियां करनेवाला भविष्यवक्ता था, कैनेथ मैकेंजी। जिसे कोइन्नाक फियोसाइके या ब्रेहन के संत के नामों से याद किया जाता है। वह 16वीं शताब्दी के अन्त में और 17वीं शताब्दी के शुरू में पैदा हुआ था। स्कॉटलैण्ड की पहाडिय़ों में आमतौर पर सभी नागरिकों में अल्पविकसित भाविष्यदृष्टा छिपा होता है। ऐसा मानने के कई कारण और प्रमाण हैं। प्रसिद्ध लेखक सर वाल्टर स्कॉट ने ऐसे अनेक लेख लिखे हैं, जिनमें साबित होता है कि स्कॉट लोगों में छठी इन्द्रिय (Sixth Sense) स्वाभाविक रूप से अधिक जागृत होती है।  ब्रेहन के संत के पास एक रहस्यमय पत्थर/नीले रंग के इस माणिक में वह भविष्य देखता था। उसके पास यह पत्थर या रत्न कैसे आया इसे लेकर स्कॉटलैण्ड में कई कथाएं प्रचलित हैं। इस भविष्यवक्ता ने प्रारम्भ में अपनी आमदनी के जरिए के रूप में भविष्यवाणियां करनी शुरू कीं। उसकी गणनाएं इतनी सही होती थी और अनुमान इतने अचूक होते थे कि धीरे-धीरे उसकी ख्याति चारों ओर फैल गई। जल्दी ही लोगों ने उसे कैनेथ मैकेंजी के बजाय ब्रेहन का सिद्ध या दृष्टा कहना शुरू कर दिया। उसकी भविष्यवाणियों में कैलेडॉनियन नहर के निर्माण के 150 साल पहले की गई भविष्यवाणी उक्ति बहुत मशहूर है। ''पोत चलेंगे टाम्नाहारिक पहाड़ी के पीछे, पूर्व से पश्चिम और पश्चिम से पूर्व में।'' ब्रिटेन में आजकल फैशन का जो रूप है, उसके बारे में बे्रहन दृष्टा का कहना था, ''देश की उन्नति होगी, मगर युवा बिगड़ेंगे और इतने जनाना छाप (Effeminate) हो जायेंगे कि उनमें साहस भी नहीं रह जायेगा। भेड़ों का झुण्ड भी उन्हें डराने के लिए काफी होगा।'' एक मामले में तो ब्रेहन दृष्टा ने ऐसी भविष्यवाणी की, जिससे लगता था कि वह बहुत पहुंचा हुआ सिद्ध पुरूष भी है। लोकाल्श के मैकेंजी ने उसके साथ दुव्र्यवहार किया तो वह बोला ''तेरी सारी जायदाद नष्ट हो जायेगी और काफी समय बाद तेरी आने वाली पीढिय़ों में मैथीसंस उसके मालिक बनेंगे।'' 128 साल बाद ऐसा ही हुआ। अलैक्जेंडर मैथीसन इस जायदाद का आखिरी वारिस बना। एक भविष्यवाणी में बे्रहन भविष्यदृष्टा ने आणविक पनडुब्बी की कल्पना की है - ''होली लॉच के पास बिना सींग और पांव की गाय जैसी चारों ओर से बन्द नावें होंगी। समुद्र से आग के तीर छोडऩे की ताकत रखने वाली नौकाओं से ऐसी किरणें निकलेंगी, जो मौत लायेगी। आज होली लॉच नामक स्थान के पास पनडुब्बियों का अड्डा है।  ब्रेहन के संत का सबसे अनोखा कारनामा खुद उसी के लिए घातक बन गया। उसने सीफोर्थ के अर्ल के पेरिस प्रवास के दौरान उसकी पत्नी इसाबेला की फरमाइश पर अपनी दिव्य दृष्टि से देखकर जो बताया वह कुछ इस प्रकार था - ''उसके वापिस न लौटने का कारण है एक खूबसूरत औरत। अपने घुटनों के बल उसके सामने बैठा अर्ल कैनेथ उसका हाथ चूमकर प्रेम की भीख मांग रहा है।''  ब्रेहन-दृष्टा की इस अद्भुत क्षमता को देखकर खुद काले कारनामों में लिप्त इसाबेला को डर सताने लगा कि कहीं यह संत उसके पति को उसके जीवन के बारे में न बता दे।  इसाबेला के जाते ही तमाम लोगों के सामने ब्रेहन-दृष्टा ने कहा ''मुझे मिटाने वालों का पूरा वंश समाप्त हो जायेगा। उसके वंश का आखिरी चिराग गूंगा-बहरा होगा और उसके चार बेटेे होंगे जो उसी के सामने मर जायेंगे। फिर इस वंश से कोई व्यक्ति ब्रेहन पर राज नहीं करेगा। सारी सम्पत्ति और भूमि एक अजनबी के हाथों चली जायेगी।'' जासूसों से जब इसाबेला को इस भविष्यवाणी का पता चला तो वह गुस्से से पगला गई। उसने हुक्म दिया कि कोइन्नाक ब्रेहन दृष्टा को शैनोरी प्वांइट पर ले जाकर सबके सामने जला दिया जाए।  जब कोइन्नाक को रस्सियों से बांधकर जलाने को ले जाया जा रहा था, तब इसाबेला ने कहा ''मूर्ख ढ़ोंगी, तूने इतना झूठ बोला है कि तू नर्क में सड़ेगा।'' इस पर संत को हंसी आ गई। उसने आसमान की ओर इशारा करते हुए कहा - ''वहां से मैं अकेला ही ऐसी मौत लिखवाकर नहीं लाया। पहले भी भले लोग ऐसे मारे गए और आने वाले वक्त में भी मारे जाते रहेंगे। मगर ऐसा हर व्यक्ति स्वर्ग जायेगा, जबकि तुम और तुम्हारे परिवार के लोग केवल नर्क में ही जा सकते हैं।'' ब्रेहन के संत के इसाबेला के परिवार के बारे में जो कहा था वह 1794 में जन्में अर्ल फ्रांसिस हंबरटन मैकेंजी के साथ पूरा उतरा। 12 वर्ष की उम्र में एक हादसे में वह गूंगा-बहरा हो गया। उसके चार बेटे थे, जो उसके सामने ही मर गये। 11 जनवरी, 1815 को हंबर स्टन भी मर गया। उसकी जायदाद एक अजनबी को मिली और धीरे-धीरे सब समाप्त हो गया।


कैग्ली ओस्ट्रो : भविष्यवेत्ता या मक्कारों का बादशाह

कैग्ली ओस्ट्रो का असली नाम जिसेप बाल्समो था। उसका जन्म सिसली के पास पेलेर्मो नामक स्थान में 8 जून, 1743 में हुआ था। उसका पिता एक यहूदी व्यापारी था, जो कंगाली के दिन न झेल पाने के कारण अनाथ जिसेप की सड़क पर छोड़ गया था। चर्च के एक पादरी ने उसे पढ़ाने-लिखाने के साथ-साथ जड़ी-बूटियों से तरह-तरह के नुक्से तैयार करने में माहिर भी बना दिया। मगर शरारतों के कारण जिसेप को चर्च से भगा दिया। उसने अपने एक मामा के यहां शरण ली। वहां उसने ड्राइंग बनाने में विशेषता हासिल की, परन्तु इस कला का भी उसने बाद में गलत ही इस्तेमाल किया। कुछ गलत दोस्तों की सोहबत में पड़कर जिसेप जादू-टोना सीखने की फिराक में इधर-उधर भटकता रहा और उसने छिटपुट भविष्यवाणियां करना सीख लिया। सन् 1768 में उसने रोम में एक असाधारण सुन्दरी लोरैंजा से विवाह कर लिया। लोगों को झांसा देकर, झूठी भविष्यवाणियां करके, उधार लेकर फरार होकर तथा मुकद्दमें बाजी के पचड़ों में बदनाम होकर जिसेप अपनी खूबसूरत परी के साथ जर्मनी चला गया और वहां से जब लन्दन आया तो अपना नाम व वेषभूषा बदल चुका था। अब सन् 1776 में वह मर्चीज पैलीग्रिनी था और लोरैंजा हो चुकी थी सेराफिना। इसके बाद उसने सट्टेबाजों को नम्बर बताना शुरू कर दिये। पता नहीं उसने यह कला सीखी कहां से। मगर उसके बताये नम्बरों पर जब रुपया बरसने लगा तो उसकी साख ऊंची हो गई थी। सौभाग्यशाली नम्बरों की तलाश में लोग उसकी पत्नि सेराफिना को रिश्वत तक देने से नहीं हिचकते थे। कहीं से उसे मिस्र की एक प्राचीन पुस्तक मिल गई और उसने बच्चों के माध्यम से जनता को मूर्ख बनाना शुरू कर दिया। भविष्यवाणी सही हो जाती तो उसका नाम होता था वरना गलती होने पर बच्चों के बचपने पर थोपा जाता था। कुछ समय बाद उसने यह नाम भी बदल दिया और वह काउंट कैग्लीओस्ट्रो के नाम से अपना धंधा करने लगा। अब उसने मेहनत करना शुरू कर दी। न्यूरैम्बर्ग में अपने भ्रमण के दौरान कैग्लीओस्ट्रो ने एक प्रभावशाली व्यक्ति साइफोर्ट के मरने की भविष्यवाणी कर तहलका मचा दिया। फिर वाकई एक माह के भीतर वह मर गया, तो लोगों ने उसे गंभीरता से लेना शुरू कर दिया। कैग्लीओस्ट्रो के जीवन का यह भाग काले जादू और तांत्रिक अनुष्ठानों की सफलताओं का दौर रहा। जब कैग्लीओस्ट्रो पोलैण्ड चला गया। तब पहली बार उसने भरे दरबार में एक भविष्यवाणी करके सबको अचम्भित कर दिया। संयोग से उसके वारसा प्रवास के दौरान ही वह भविष्यवाणी सही भी हो गई। सम्राट स्टानिस्लास आगस्टस भविष्यवाणियों और तंत्र-मंत्र में बेहद रूचि रखते थे और इसी कारण वह कैग्लीओस्ट्रो को सर्वाधिक महत्व देने लगे थे। इससे चिढ़कर दरबार में शाही परिवार की एक महिला ने कहा कि अगर कैग्लीओस्ट्रो कुछ जानता है तो बताये इस माह उसके साथ क्या होने वाला है? इस पर कैग्लीओस्ट्रो ने बताया ''मैं जानता हूूं कि इसी महीने आप एक सफर पर जायेंगी। रास्ते में आपकी घोड़ा गाड़ी के साथ मामूली दुर्घटना होगी। जब आप दूसरे साधन के इंतजार में होंगी, तब तमाशबीन आपको सेव फेंककर चोट पहुंचायेंगे। वहां से आप तालाब के पास अपने कपड़े तथा हाथ-पैर साफ करने जायेंगी तो एक पुरुष से आपकी मुलाकात होगी, जिससे तमाम दिक्कतों के बावजूद आपकी शादी हो जायेगी। इस घटना के सही होने के बाद भी उसे पौलेण्ड से निकाल दिया गया, क्योंकि जब उसने राजकुमार पोनीन्स्की को पारस पत्थर का फर्जी चमत्कार दिखाकर ठगना चाहा। उसने हंगरी और बोहेमिया की सम्राज्ञी की सन् 1780 में मौत की भविष्यवाणी की, जो सही हुई। एकाध सफलता से कैग्लीओस्ट्रो भटक जाता था, वही हुआ। सन् 1785 में उसने प्रेतात्माओं का आव्हान करना तथा तंत्र-मंत्र का प्रदर्शन शुरू कर दिया। एक मौके पर उसने एक साथ 13 प्रेतात्माओं को बुला लिया, ऐसा ब्यौरा मिलता है। पेरिस आने पर कैग्लीओस्ट्रो को फिर भविष्यवाणी करने का दौरा पड़ा, उसने फ्रांस के सम्राट लुई पन्द्रहवे, सम्राज्ञी और रखैल डुबैरी की गर्दनें काटे जाने की बात कर सबको दहला दिया था और ये भविष्यवाणियां सही भी हुई। यहीं उसने नेपोलियन बोनापार्ट के उत्थान-पतन की सही भविष्यवाणियां कीं। फ्रांसीसी, जनरल ला मार्लीएरे पर मुकद्दमा चलाया जा रहा था, उन्हें बेहद बेचैनी थी, कैग्लीओस्ट्रो से पुछवाया तो जवाब मिला - जनरल को प्राणदण्ड मिलेगा और यह भविष्यवाणी भी सत्य साबित हुई।  कैग्लीओस्ट्रो पर भूत-प्रेत सिद्ध करने का शौक चर्राया। वैसे तो अपनी भविष्यवाणियां भी वह एक माध्यम के जरिये करता था। मगर चोर चोरी से जाये, हेराफेरी से न जाये। फलस्वरूप उस पर महल से सम्राज्ञी के हीरे जड़ा हार चुराने का आरोप लगा और उसे फ्रांस से निकाल दिया। उसकी सबसे मशहूर भविष्यवाणी 14 दिसम्बर 1789 को लुई सोलहवें के पतन को लेकर थी। जब वह भविष्यवाणी 5 अक्टूबर 1789 को पूरी होनी शुरू हो गई तो चारों ओर कैग्लीओस्ट्रो की शोहरत के झण्डे गड़ गये। कुछ समय बाद विद्रोह थमा तो कैग्लीओस्ट्रो पर अनेक आरोप लगाकर उसे पत्नी सेराफिना सहित कैद में डाल दिया गया। अदालत ने उसे मृत्युदण्ड दिया परन्तु पोप ने इस सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया। 26 अगस्त, 1795 को वह मरा पाया गया, उसकी बीबी एक साल बाद मर गई। जब 1797 में क्रांन्तिकारियों ने शहर पर कब्जा कर लिया तो सबसे पहिले कैग्लीओस्ट्रो के बारे में पूछा गया। अगर वह जीवित होता तो क्रांतिकारी उसे सम्मानित करते क्योंकि उसने क्रांति की कामयाबी की भविष्यवाणी बहुत पहले कर दी थी।

जोअन्ना : स्वयंभू पैगम्बर: स्वर्ग जाने का परमिट
जोअन्ना का जन्म 1750 में इग्लैण्ड के डेवनशायर प्रान्त के गिटीशैम नामक स्थान में हुआ था, जोअन्ना शुरू से ही पूजा-पाठ तथा निहायत धार्मिक वृत्तियों की लड़की थी। सन् 1809 में इग्लैण्ड के यार्क क्षेत्र की एक घटना की बदौलत पहली बार पता चला कि जोअन्ना साउथकॉट नाम की एक स्वयंभू पैगम्बर लोगों को स्वर्ग जाने के परमिट जारी कर रही थी। दरअसल जोअन्ना शहर में एक अच्छे भविष्यवक्ता के रूप में प्रसिद्ध थी। अफसर हैरान थे कि अच्छा खासा भविष्य बताने का काम छोड़कर आखिर उसने लोगों को स्वर्ग भेजने की आढ़त का यह अजीबो-गरीब धन्धा शुरू क्यों कर दिया? जोअन्ना से सम्पर्क करने जब मजिस्ट्रेट के साथ कुछ सिपाही गये तो वह बेहद रूतबे के साथ उठी और मजिस्टेऊट फिलिप स्कॉट के सामने जाकर बोली ''जाओ अपने घर जाओ! वहां तुम अपनी तिजोरी खुली छोड़ आए हो। यदि तुम फौरन वहां नहीं पहुंचे तो तुम्हारे जरूरी कागजों के साथ सारा सामान चोरी हो जायेगा। तुम्हारे कमरे की खिड़की भी खुली है, उसमें सलाखें हैं नहीं तथा वह सड़क के पास है।''मजिस्ट्रेट साहब ताबड़तोड़ वापिस भागे और थोड़ी देर बाद ही वापस आकर जोअन्ना से कहने लगे, ''आप महान् हैं, मगर मुझे अपना कत्र्तव्य पालन तो करना ही होगा।''जोअन्ना पर कोई असर नहीं पड़ा। वह बोली, ''आप अपना काम करिये, मैं आपना काम करती रहूंगी। मुझे भविष्यवाणी करने तथा समाजसेवा करने के पवित्र काम से कोई नहीं रोक सकेगा।'' सन् 1793 में जोअन्ना की 46 भविष्यवाणियां सही उतरी, जिनसे उसकी शोहरत के झण्डे यूरोप के अलावा जापान तथा रूस तक गड़ गये। सन् 1801 में उसने अपनी भविष्यवाणियों की किताब ''विश्वास के विचित्र प्रभाव'' (The Strange Effects of faith) प्रकाशित कराई। किताब क्या थी? तहलका थी। मगर इसका एक खराब असर हुआ। अपनी कामयाबी से जोअन्ना बौखला गईं। सन् 1802 में वह इग्लैण्ड में आकर बस गईं। सही मायनों में यहीं आकर उसने अपनी प्रतिभा का दुरुपयोग करना शुरू कर दिया। स्वर्ग जाने के परमिट जारी करने के कारण वह विवादों का केन्द्र बन गईं। सन् 1805 तक इस प्रकार के 10,000 परमिट जारी हो चुके थे, जोअन्ना के विरोधियों ने जब उसके विरूद्ध सरकार पर दबाव डाला तो सरकार हरकत में आयी। जांच पड़ताल शुरू की, मगर जांच अधिकारी को वह अपना भक्त बना लेती थी। सन् 1810 में जोअन्ना ने साउथकॉट सम्प्रदाय के अनुयायियों के लिए विशेष पूजा गृह बनवाने शुरू किये गये। करीब 17 पूजा गृह न केवल आज तक विद्यमान हैं अपितु सक्रिय भी। 64 वर्ष की आयु में जोअन्ना ने भविष्यवाणी की कि अगले साल उसके गर्भ से संसार को नई राह दिखाने वाला मसीहा-शिलोह पैदा होगा। जोअन्ना की पुस्तक ''अचम्भों की तीसरी किताब'' (Third Book of Wonders) में नये मसीहा के बारे में काफी कुछ बताया गया था। 17 मार्च, 1814 को अचानक ही जोअन्ना बीमार पड़ गई। माने हुए डाक्टरों ने उसकी जांच की तो पाया, इतनी बूढ़ी होते हुए भी वह शारीरिक रूप से पूर्ण युवती लगती है और उसे चार माह का गर्भ था, परन्तु मसीहा कभी नहीं जन्मा। रहस्य के कोहरे में लिपटी जोअन्ना की हालत दिन-ब-दिन खराब होती गई। बेशुमार अनुयायी नये मसीहा के आने की तैयारियों में जुटे छोड़कर 27 दिसम्बर, 1814 को जोअन्ना संसार से कंूच कर गई। अपने मित्र और विख्यात डाक्टर रिचर्ड रीस को जोअन्ना ने हिदायत दी थी कि उसकी मौत के चार दिन बाद ही उसके शरीर की चीरफाड़ की जाए। उसकी इच्छानुसार उसके शरीर को चीरकर देखा तो डाक्टर भी चकरा गये कि चार माह के गर्भ के सारे लक्षण होने के बावजूद जोअन्ना का गर्भ था ही नहीं। दरअसल, यह उसकी परामानसिक इच्छाशक्ति का चमत्कार था। उसके अनुयायियों ने उसे रीजेन्ट्स पार्क स्थित सैंट जोन्स बुड सिमेटरी में दफना दिया। उसकी कब्र पर लगे पत्थर पर खुदा था, ''और अधिक शक्तिशाली बनकर तेरा अवतरण होगा।'' सन् 1974 में अचानक रीजेन्ट्स पार्क में एक शक्तिशाली विस्फोट हुआ। इबारत खुदा पत्थर टुकड़े-टुकड़े हो गया। फिर भी उसके अनुयायियों को आशा है - आज नहीं तो कल जोअन्ना आयेंगी। हां, विस्फोट का रहस्य अभी तक बना हुआ है।

भविष्यदृष्टाओं की सम्राज्ञी: मैरी लेनोर्मा

27 मई, 1772 को फ्रांस के अलेकॉन प्रान्त में जन्मी लेनोर्मा के पिता सम्राट लुई-पन्द्रहवें के चहेते दरबारियों में से एक थे और मां अनिद्य सुन्दरी थी। पिता की अल्पायु में मृत्यु होने के बाद उसने सौतेले पिता का प्यार कुछ समय तक पाया और फिर मां के मर जाने के बाद वह बिल्कुल अनाथ हो गयी। सौतेले पिता ने एक और शादी कर ली और फिर लेनोर्मा का उस घर से रिश्ता ही टूट गया। सात वर्ष की उम्र में उसे बेनेडिक्टाइन कान्वेंट में पढऩे भेजा गया। तभी उसके सहपाठियों तथा शिक्षकों को पता चला कि नन्हीं लेनार्मा में भविष्य पढऩे की विचित्र ताकत है। वह बता देती थी किस दिन बारिश होगी? कीचड़ में कौन गिरेगा? किसकी तबियत खराब होगी? किस बच्चे का सामान खो जायेगा? और वह सामान किसके पास मिलेगा? इम्तिहान में क्या पूछा जायेगा? उस दौर में ईसाई विश्वास के अनुसार ऐसी शक्ति सिर्फ शैतान के इशारे पर मिल सकती थी। इसलिए नन्हीं लेनोर्मा को शुद्ध करने के लिए उसे सूखी डबलरोटी का टुकड़ा व पानी दिया जाता था। मगर चर्च में कोई न कोई ऐसा जरूर होता था, जिसे भविष्य जानने की चिन्ता रहती थी। इसलिए लेनोर्मा की फ्राक की जेबें हमेशा काजू, बादाम, अखरोट की गिरियों से भरी रहती थी। सिर्फ 11 वर्ष की अल्पायु में उसने एक ऐसा कारनामा किया, जिसकी वजह से उसकी धाक जम गई। बेनेडिक्टाइन कान्वेंट में 'मदर' की जगह खाली थी। कान्वेंट की महिलाओं द्वारा अनुमान व दावे किये जा रहे थे कि अमुक को मदर नियक्त किया जावेगा। लेनोर्मा वहीं पर अपना पाठ सुनाने के चक्कर में घूम रही थी? उन लोगों की बातें सुनकर लेनोर्मा ने कहा कि आप सभी के अनुमान गलत होंगे, क्योंकि सम्राट खुद अपना उम्मीदवार कहीं दूसरी जगह से लाकर बैठा देंगे और वैसा ही हुआ। लेनोर्मा को उच्च शिक्षा के लिए एक स्कूल से दूसरे स्कूल भेजा जाता रहा। शिक्षा के स्तर पर भी उसने यह साबित कर दिया कि वह एक असाधारण प्रतिभा सम्पन्न छात्रा है। कुछ समय बाद लेनोर्मा ने अपने एक मित्र फ्लेमरमोंट के साथ अपना ज्योतिष कार्यालय खोला, पेरिस में। यहां एक भूमिगत कमरे में लोगों को भाग्य बताया जाता था। प्रत्यक्ष में वह पुस्तकें बेचने का कारोबार करती थी लेकिन उसका असली काम तो भविष्य दर्शन था। उसकी दूकान में बने तहखाने में किताब खरीदने के बहाने ग्राहक नीचे आते थे और अपना भविष्य बंचवाकर पीछे के रास्ते से निकल जाते थे। पुलिस और कानून दोनों की नजर लेनोर्मा पर थी, मगर उन्हीं में ऐसे भी थे, जिन्होंने उसे सुरक्षा का पूर्ण वचन दे रखा था। फ्रांस की कई मशहूर हस्तियों के बारे में उसने महत्वपूर्ण भविष्यवाणियां कीं। जैसे राजकुमारी डी लैंबाल भयानक मौत मरेगी, लजार हाश नामक एक व्यक्ति महान् जनरल बनेगा, मगर वह 30 वर्ष की उम्र तक जी पायेगा। फ्रांस के तीन महान् क्रांतिकारी अप्राकृतिक मौत मरेंगे, जिनके नाम मरात, सैंट जस्ट और रोबेसपियरे होंगे। फ्रांसीसी सम्राट के दरबारी रंगमंच का डायरेक्टर मौते जियर क्रांतिकारियों द्वारा पकड़े जाने के पूर्व लेनोर्मा के पास आया था। उस औरत ने मुझे गौर से देखा और कहा तुम पकड़े जाओगे, काफी चोटें आयेंगी। मगर वहीं चोटें तुम्हें मृत्यु से बचायेगी। तुम बहुत जियोगे और नाम कमाओगे। मोंतेजियर पकड़ा गया, जल्लाद के द्वारा सिर कटवाने से भी बचा, नये सम्राट ने जीवनदान दे दिया और वह लम्बी आयु तक जिया एवं नाम भी खूब कमाया तथा सारी उम्र लेनोर्मा का गुण गाता रहा। नेपोलियन बोनापार्ट सन् 1793 में लेनोर्मा के पास आया, तब वह फ्रांस की फौज की नौकरी से निराश हो चुका था। फ्रांस में उसका भविष्य क्या होगा? क्या उसे टर्की जाने का पासपोर्ट मिल सकेगा? ये सवाल पूछने के बाद वह भौचक्का रह गया, जब लेनोर्मा ने उससे कहा ''जाने की जल्दी क्या है? तुम तो फ्रांस के निर्माता बनने के लिए पैदा हुए हो, तुम्हें हुकुमत करनी है। तुम सम्राट बनोगे। इस देश से तुम जाओगे तो नयी विजयश्री पाने को जाओगे। उसने एक और भविष्यवाणी की थी। एक विधवा तुम्हें खुशहाल और प्रभावशाली बनायेगी, मगर तुम उसके साथ बेवफाई मत करना अन्यथा तुम दोनों का सर्वनाश हो जायेगा।  लेनोर्मा की भविष्यवाणी सत्य हुई। नेपोलियन बोनापार्ट यूरोप का सम्राट बना। सैन्य अधिकारी की विधवा जोसेफीन से शादी की। किन्तु 1809 में उसके संबंध जोसेफीन से बिगडऩे लगे। इसके बाद उसने जोसेफीन से तलाक ले लिया। नेपोलियन बोनापार्ट के विषय में जनवरी 1810 में लेनोर्मा ने भविष्यवाणी की ''वह जो बना है सिपाही से सम्राट, सन् 1814 में उसकी हुकुमत मिट जायेगी और वह एक द्वीप में कैदी बनकर रह जायेगा। भविष्यवाणी सही निकली। वाटरलू के मैदान में नेपालियन बोनापार्ट युद्ध में पराजित हुआ तथा एल्वा द्वीप पर मृत्युपर्यन्त कैद रहा। इससे लेनोर्मा की ख्याति बढऩा ही थी क्योंकि उसकी भविष्यवाणी अक्षरस सही साबित हुआ। सर्वज्ञाता भविष्यवक्ता लेनोर्मा 25 जून, 1843 में 71 वर्ष की उम्र में ही चल बसी। उसने विभिन्न विषयों पर 34 ग्रंथ लिखे। एक आलोचक ने उसकी मौत पर लिखा - ''वह महान थी और महान भविष्यवक्ता थी। एक अन्य रोचक घटना - सन् 1804 में एक पेंटर स्वीडन से पेरिस कुछ खरीददारी करने आया। उत्सुकतावश लेनोर्मा के पास अपना भाग्य जानने गया। लेनोर्मा ने कहा ''अगर मैं यह कहूं कि तुम्हारे बारे में, मैं जो भविष्यवाणी करने जा रही हॅू उसकी कीमत 10,000 फ्रांक (थ्तंदब) है तो क्या हाथ दिखाओगे?'' पेन्टर सकपका गया और बोला - अगर मेरे पास इतना धन आया तो जरूर दूंगा। तो सुनो होने वाले सम्राट, तुम दो देशों के राजा बनोगे और लगभग 25 साल तक शासन करोगे।'' लेनोर्मा ने गम्भीरता से कहा। तुम पेन्टर नहीं हो, तुम कोई फौजी अफसर हो।  वह पेन्टर था बर्नादो (Bernadotte) जो नेपोलियन की फौज में मार्शल था। सन् 1818 में वह स्वीडन और नार्वे का सम्राट बना। उसने 1844 तक लगातार शासन किया। मरते समय उसकी अपनी वसीयत में लेनोर्मा को 10,000 फ्रांक देने का निर्देश था।





- पंडित पी एन भट्ट
अंतरराष्ट्रीय ज्योतिर्विद,
अंकशास्त्री एवं हस्तरेखा विशेषज्ञ
संचालक : एस्ट्रो रिसर्च सेंटर
जी-4/4,जीएडी कॉलोनी, गोपालगंज, सागर (मप्र)
मोबाइल : 09407266609
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शुक्रवार, 12 जुलाई 2013

शिवराज सिंह बनेंगे तीसरी बार मुख्यमंत्री, नरेंद्र मोदी बनेंगे प्रधानमंत्री



मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में शिवराज सिंह बनाएंगे हैट्रिक
मध्यप्रदेश में भाजपा 195 सीटें जीतेगी

- राजकुमार सोनी


नवंबर 2013 में होने वाले मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा हैट्रिक बनाकर शिवराज सिंह चौहान तीसरी बार मुख्यमंत्री बनेंगे। पिछले 2008 के विधानसभा चुनाव में 151 की तुलना में भाजपा को 195 सीटें मिलेंगी, वहीं कांग्रेस की सीटें इस बार घट जाएंगी। वहीं 2014 में होने वाले लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारी सफलता प्राप्त कर प्रधानमंत्री बनेंगे।
इंदौर के प्रसिद्ध लाल किताब विशेषज्ञ एवं भविष्यवक्ता पंडित आशीष शुक्ल ने बताया कि लाल किताब के अनुसार मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान तीसरी बार हैट्रिक बनाकर मुख्यमंत्री बन जाएंगे। भाजपा को इस बार 195 सीटें मिलेंगी, जबकि कांग्रेस को वर्तमान सीटों से भी कम सीटें मुश्किल से मिल पाएंगी। उन्होंने बताया कि सूर्य-मंगल के योग के कारण शिवराज की कुंडली में राजयोग बना हुआ है। इसमें शनि ग्रह अपना उच्च का प्रभाव दिखाएगा। यह कहते हैं कि प्रबल शनि एक बार शिवराज को सत्ता दिलाने में अहम भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि शनि-राहु की दृष्टि टेड़ी होने से कांग्रेस पार्टी को इस बार सीटों का अधिक नुकसान होगा। वहीं बसपा, सपा व निर्दलीय की भूमिका नगण्य रहेगी। चूंकि शनि धर्म-कर्म व न्याय का देवता है इसलिए शनि अच्छे कार्य करने वालों का साथ देता है। इसका कई गुना लाभ जातक को मिलता है। पंडित शुक्ल ने बताया कि भारतीय जनता पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर व भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभात विधान सभा चुनाव में बेहतर भूमिका निभाएंगे जिससे पार्टी को कई गुना लाभ योग होगा। ज्योतिर्विद एवं भविष्यवक्ता डॉ. एच.सी. जैन ने कहा कि अंकों के आधार पर शिवराज का राज बरकरार रहेगा। तीसरी बार सत्ता में वापस लौट रहे शिवराज नए कार्यकाल में पहले से बेहतर काम करेंगे। गरीबों के हित में कई योजनाएं लागू कर उन्हें लाभांवित करेंगे। इसी तरह मध्यप्रदेश में उद्योग-धंधों, व्यापार नीति, कर नीति लचीली होगी जिससे उद्योग-व्यापार जगत को लाभ होगा। देश-विदेशों से कई कंपनियां मध्यप्रदेश में आकर निवेश करेंगी। डॉ. जैन ने बताया कि ग्रहयोगों के प्रभाव से शिवराज सिंह का प्रभाव देश-विदेश में काफी बढ़ेगा, लेकिन समय-समय पर भीतरघात और अपनों से ही खतरा वाली कहावत उन्हें हमेशा याद रखना होगी। आने वाले एक साल के अंदर उनका स्वास्थ्य भी बिगड़ सकता है जो कुछ समय के लिए हो सकता है। इस बात का उन्हें खास ध्यान रखना होगा। भोपाल के भविष्यवक्ता आचार्य पंडित राज ने कहा कि ग्रहयोग के कारण फिलहाल कांग्रेस में और कलह फिलहाल चलता रहेगा। कांग्रेस के एक दर्जन बड़े  नेता भाजपा सहित दूसरी पार्टी में शामिल हो सकते हैं, वहीं भाजपा के कई नेता कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं। वर्तमान स्थिति के अनुसार भाजपा-कांग्रेस के नेताओं में आरोप-प्रत्यारोप, घोटाले, छापामार कार्रवाई जैसी कार्रवाई हो सकती हैं। कई नए मामले सामने आने से लोग दांतों तले अंगुली दबाते नजर आएंगे। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश विधान सभा चुनाव - 2013 में भाजपा हैट्रिक बनाकर पूरे देश में अपना नाम रोशन करेगी।  भारतीय जनता पार्टी द्वारा नरेंद्र मोदी को कमान सौंपने के बाद भाजपा में नए जीवन का संचार हुआ है। यह ग्रहयोगों के कारण संभव हुआ है। नरेंद्र मोदी का व्यक्तित्व नए जमाने के साथ कदमताल के साथ चलने वाला है। उनके नेतृत्व में पार्टी को आने वाले लोकसभा चुनाव में भारी सफलता मिलेगी एवं नरेंद्र मोदी अगले प्रधानमंत्री बनेंगे। भविष्यवक्ता डॉ. एच.सी. जैन ने कहा कि वर्ष 2014 में गुरु ग्रह अपना बेहतर प्रभाव दिखाएगा जिससे मोदी को सफलता मिलेगी, लेकिन 14 से 16 माह बाद उनके विरोधी सक्रिय होकर भीतरघात का प्रयास करेंगे। लोकसभा चुनाव -2014 में भाजपा को भारी सफलता मिलेगी यह तय है। लालकिताब विशेषज्ञ पंडित आशीष शुक्ल ने बताया कि लोकसभा चुनाव में लालकिताब के अनुसार शनि व गुरु ग्रह प्रमुख भूमिका अदा करेंगे जिससे भाजपा को भारी सफलता मिलेगी।