मंगलवार, 29 नवंबर 2011

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के सफलतम 6 साल



लाड़ली लक्ष्मी और बेटी बचाओ योजनाओं से प्रदेश का नाम विश्व में रोशन

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान
सरकार के छह वर्षों के दौरान मध्यप्रदेश के व्यक्तित्व और छवि, दोनों में निखार आया है। सरकार का संस्कारी, आत्मीय, सेवाभावी व संवेदनशील व्यक्तित्व बना है। वह हर गरीब के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी रहती है, तो विकास चक्र को गतिशील बनाने के लिए समाज भी सरकार के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रहा है। किसी समय बीमारू कहे जाने वाले राज्य ने 11वीं पंचवर्षीय योजना में आर्थिक विकास में राष्ट्रीय औसत से अधिक की वृद्धि दर अर्जित की है। 10.06 प्रतिशत की आर्थिक विकास दर आश्चर्यजनक ही कही जाएगी, क्योंकि आज से पांच वर्ष पूर्व जब प्रदेश के आर्थिक विकास की दर के लक्ष्य का निर्धारण किया गया था, तब किसी को नहीं लगता था कि प्रदेश इतनी विकास दर अर्जित कर पाएगा।
यही कारण था कि प्रदेश की 11वीं पंचवर्षीय योजना के लिए विकास दर का लक्ष्य 7.6 प्रतिशत तय किया गया था, पर प्रदेश ने हासिल कर ली है, 10.06 प्रतिशत की विकास दर। यही एक उपलब्धि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व के करिश्मे को स्थापित करने के लिए पर्याप्त है। प्रदेश की अग्रता आर्थिक विकास तक ही सीमित नहीं है। राज्य की प्रगति अन्य क्षेत्रों में भी हुई है। पर्यटन व उद्योगों को बढ़ावा देने की बात हो या फिर खेलों को प्रोत्साहन देने या ई-गवर्नेंस की कोशिशें हों, भ्रष्टाचार को नियंत्रित करने के नवाचार हों, बुनियादी सुविधाओं के विकास के काम अथवा सामाजिक क्षेत्र में सरकार की भागीदारी और मानव मूल्यों के प्रति उसका समर्पण, इन सभी दिशाओं में प्रदेश की चमकदार छवि बनी है।
अनेक अवसरों पर केंद्र सरकार और विश्व बैंक जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने पुरस्कार और सराहना के द्वारा इसे अभिव्यक्त भी किया है। कंप्यूटर सोसायटी ऑफ इंडिया से प्रदेश को बेस्ट ई-गवर्नड स्टेट का दर्जा मिला है। सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में मध्यप्रदेश को 34 पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। वर्ष-2009-10 में भारत सरकार द्वारा कुल स्थापित छह गोल्डन आइकॉन पुरस्कार में से तीन मध्यप्रदेश को मिले हैं। इसी प्रकार, राष्ट्रीय टूरिज्म अवार्ड वर्ष-2009-10 में प्रदेश को सर्वश्रेष्ठ राज्य का पुरस्कार प्राप्त हुआ है। राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थल खजुराहो की नगरपालिका को सर्वश्रेष्ठ नागरिक सेवाओं के प्रबंधन वाले स्थल का पुरस्कार मिला है। वर्ष-2010 के लिए राज्य को राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय खेल प्रोत्साहन पुरस्कार से सम्मानित किया है। पुरस्कार में कहा गया है कि प्रदेश में विभिन्न खेलों में नई ऊर्जा भरने के प्रयासों से अन्य राज्यों को प्रेरणा लेनी चाहिए। वहीं, सामाजिक क्षेत्र में महिला सशक्तीकरण के प्रयासों और सामाजिक क्षेत्र में बजट का 38 प्रतिशत व्यय करने के लिए विश्व बैंक की प्रबंध संचालक ने भी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की भूरि-भूरि सराहना की है। दरअसल, शिवराज सरकार के छह वर्षों के कार्यकाल में प्रदेश का संस्कारित व्यक्तित्व निखरा है।
'आओ बनाए अपना मध्यप्रदेशÓ अभियान ने प्रदेश में विकास की दौड़ में जिद, जुनून और जज्बे के साथ प्रयास करने की जन और तंत्र, दोनों को नई दिशा दी है। मध्यप्रदेश गीत और गान ने एकजुटता का नया भाव बनाया है। प्रदेश में जनता और सरकार के संबंधों में भी बदलाव आया है। जहां सरकार के निर्णयों, योजनाओं और कार्यक्रमों के नीति-नियोजन में जनता की भागीदारी बढ़ी है, तो वहीं जनता के उत्सवों और सामुदायिकता में सरकार की सहभागिता भी बढ़ी है। यह भी पहली बार हुआ, जब आमजन के साथ मिलकर उत्सव मनाने के लिए मुख्यमंत्री निवास के द्वार भी खुले हैं, वह भी बिना किसी भेदभाव के। जिस उत्साह से रोजा इफ्तार का आयोजन मुख्यमंत्री निवास पर होता है, वैसा ही क्षमावाणी का कार्यक्रम भी होता है। हिंदू हों, सिख या क्रिश्चियन, सभी के उत्सवों में प्रदेश की जनता का मुखिया जनता के उल्लास व उत्साह में शामिल होता है। इससे मुख्यमंत्री का जनता से सीधा संपर्क स्थापित हुआ है। इन छह वर्षों में महिला व किसान पंचायतों सहित 21 पंचायतों का आयोजन विभिन्न वर्गों के साथ मुख्यमंत्री निवास पर हुआ है। विचार-विमर्श से आए निष्कर्षों के सुपरिणाम भी प्रदेश में दिख रहे हैं।
सरकार आज पीडि़त मानवता की सेवा के लिए सदा तत्पर रहती है, फिर चाहे वह परिवार के सदस्य की बीमारी हो, जन्म, विवाह अथवा शिक्षा-दीक्षा। सरकार ने जन्म से लेकर मृत्यु तक के अवसरों पर आर्थिक मदद की योजनाएं संचालित की हैं। उसने शिक्षा के मार्ग की हर बाधा को भी दूर किया है। गरीबों के बच्चों के लिए पहली कक्षा से 50 रुपए छात्रवृत्ति, 12वीं कक्षा तक नि:शुल्क पाठ्य-पुस्तकें, छात्राओं को दो जोड़ी गणवेश और छात्राओं के साथ ही छात्रों को भी इस वर्ष से साइकिलें उपलब्ध कराई जा रही हैं। गरीब बच्चों को विदेशों में अध्ययन के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी है।
परिवार के भरण-पोषण के लिए अन्नपूर्णा योजना द्वारा सस्ती दरों पर खाद्यान्न उपलब्ध कराने, प्रसव से पहले और बाद में महिलाओं को स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ ही उचित आराम, आहार और पोषण में सहयोग, साथ ही लाड़ली लक्ष्मी, कन्यादान व अटल बाल आरोग्य मिशन जैसे अनेक प्रयासों से गरीबों की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में सरकार कोई कसर नहीं छोड़ रही है। अनुसूचित जाति और जनजाति के गरीबी रेखा से नीचे जीवन बसर करने वाले परिवारों के सदस्यों को नि:शुल्क उपचार की व्यवस्था के लिए शुरू की गई दीनदयाल अंत्योदय उपचार योजना के साथ ही कमजोर वर्ग के ऐसे रोगियों को, जिनको कहीं और से सहायता नहीं मिलती है, उन्हें भी आर्थिक सहायता दी जाने लगी है। मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान का बजट बढ़ाकर 20 करोड़ कर दिया गया है।
मुख्यमंत्री की पहल पर लागू बाल हृदय योजना में छोटे बच्चों के दिल के ऑपरेशन के महंगे उपचार की व्यवस्था हो गई है। इस योजना के लिए राशि जुटाने हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह द्वारा अपने स्मृति-चिन्ह समृद्ध वर्ग में बांट दिए गए हैं। यानी, सारांश यह है कि घरेलू कामकाजी बहनों, हाथठेला, रिक्शा चालक, मंडी हम्माल व तुलावटी, नि:शक्तजन, खेतिहर मजदूरों सहित अनुसूचित जाति-जनजाति के लोग, महिलाओं और किसान जैसे कमजोर और वंचित तबकों तक स्वतंत्र भारत में आजादी का फल उनके कल्याण की योजनाओं के रूप में पहुंचाने का प्रयास मध्यप्रदेश में इन छह वर्षों में हुआ है।
मध्यप्रदेश देश का वह पहला राज्य है, जहां लोक सेवा प्रदाय गारंटी कानून द्वारा यह व्यवस्था की गई कि आमजन को सरकार की सेवाओं के लिए याचना की जरूरत न रहे। इस कानून से व्यवस्था का स्वरूप ही बदल गया है। सेवा में देरी पर संबंधित शासकीय सेवक को अर्थ दंड से दंडित करने और नागरिक को दंड राशि क्षति-पूर्ति के रूप में देने की व्यवस्था है। केंद्र सरकार के अनुमोदन के लिए लंबित विशेष न्यायालय विधेयक इस दिशा में दूसरी क्रांतिकारी पहल है। इन प्रयासों का जनता ने स्वागत ही किया है।

अजय वर्मा

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