शुक्रवार, 18 नवंबर 2011

संसद को सुचारू रूप से चलाने की तैयारी



- राजेन्द्र चतुर्वेदी

सत्तापक्ष और विपक्ष, दोनों समझ रहे हैं कि यदि शीतकालीन सत्र में संसद में काम नहीं हुआ, तो उन्हें जनाक्रोश का सामना करना पड़ सकता है।


यूं तो संसद का शीतकालीन सत्र 22 नवंबर से प्रारंभ होना है, पर वह ठीक से चल सके, इसकी तैयारियां लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने अभी से प्रारंभ कर दी हैं। गुरुवार को उन्होंने सभी दलों की एक बैठक बुलाई और उसमें वे मुद्दे चिन्हित किए गए, जिन पर संसद में बहस होनी है। बहरहाल, महंगाई सहित ऐसे 45 मुद्दे चिन्हित किए गए हैं, जिन पर सरकार को विपक्ष के तीखे हमलों का सामना संसद में करना होगा। विपक्ष इन सभी मुद्दों पर बहस करने के लिए राजी बताया गया है। यानी, वह संसद में गतिरोध उत्पन्न नहीं करेगा, बल्कि बहस में ही सरकार को घेरेगा। यह सही है कि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) ने इस बैठक में यह भी साफ कर दिया है कि वह संसद सत्र के पहले ही दिन महंगाई पर काम रोको प्रस्ताव लाएगी। देखना है कि इस पर क्या होता है? इसके बावजूद यह उम्मीद तो पैदा हो ही गई है कि संसद के शीतकालीन सत्र में कामकाज ठीक-ठाक ढंग से होगा।
ऐसा इसलिए कि सरकार व विपक्ष, दोनों चाहते हैं कि संसद में काम हो। लगता है कि विपक्ष की समझ में यह बात आ गई है कि यदि संसद ठप हो जाती है, तो इससे देश की नजरों में उसकी प्रतिष्ठा नहीं बढ़ती, तो यही बात सरकार भी शायद समझने लगी है। यह तो संसदीय कार्यमंत्री पवन कुमार बंसल बुधवार को ही साफ कर चुके हैं कि शीतकालीन सत्र में सरकार 53 विधेयक पेश करने जा रही है। इनमें वह लोकपाल बिल तो शामिल है ही, जो सरकार के गले में घंटी की तरह बंधा है, तो जमीन अधिग्रहण जैसे तमाम जरूरी विधेयक भी इनमें शामिल हैं। यानी, संसद के शीतकालीन सत्र में काम नहीं हुआ, तो सत्तापक्ष व विपक्ष, दोनों को जनता के गुस्से का सामना करना पड़ेगा। इससे बचने के लिए मीरा कुमार अभी से सक्रिय हैं। यहां सुकून की बात यह है कि राजनीतिक दल शायद जनता के गुस्से की कीमत जानने लगे हैं।

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