मंगलवार, 15 नवंबर 2011

समाधान की दिशा में आगे बढ़ें रमेश



- राजेंद्र चतुर्वेदी

जयराम रमेश ने इस सवाल का उत्तर ढूंढ लिया है कि माओवाद की समस्या गंभीर क्यों हो रही है? अब वे समाधान की दिशा में भी आगे बढ़ें।

केंद्रीय पर्यावरण राज्य मंत्री की हैसियत से अपने चर्चित फैसलों के लिए हमेशा सुर्खियों में रहे जयराम रमेश फिलहाल केंद्र सरकार में ग्रामीण विकास मंत्री हैं और वे माओवाद की समस्या के तमाम पहलुओं को समझने की कोशिश करने में लगे हुए हैं। उनका कहना है कि यदि पंचायत एक्सटेंशन टू शिड्यूल एरिया एक्ट-1996 (पेसा) को सही तरीके से लागू किया गया होता, तो माओवाद की समस्या इतनी गंभीर नहीं होती, जितनी अब हो गई है। गौरतलब है कि यह कानून अनुसूचित क्षेत्रों में पंचायतों की भूमिका को प्रभावी बनाने के लिए बनाया गया था, पर जयराम रमेश की यह बात सौ फीसदी सच है कि इस कानून को ठीक से लागू नहीं किया गया। माओवाद की समस्या का समाधान यही है कि प्रभावित इलाकों में पंचायतों को ताकतवर बनाया जाए, तो इसके साथ ही साथ यह भी होना चाहिए कि ऐसे इलाकों के नागरिक सरकार और सरकारी अमले पर भरोसा कर सकें। जाहिर है कि विश्वास बहाली की यह पहल भी सरकार की ओर से ही होनी चाहिए। सुरक्षा बलों का इस्तेमाल तो उस अंतिम चरण में होना चाहिए, जब तमाम तरह के रचनात्मक प्रयासों के बाद भी लोग चीन के माओ की विचारधारा पर चलते रहें।
मगर, यहां आलम यह है कि इस समस्या का समाधान सुरक्षा बल अपने विकराल तौर-तरीकों से कर रहे हैं। स्थिति अब भी नियंत्रण से बाहर नहीं हुई है और जयराम रमेश ने समस्या की शिनाख्त भी सही तरीके से कर ली है, तो क्यों न 'पेसाÓ को अब ठीक से लागू कर दिया जाए? जिस दिन आदिवासियों को लगने लगेगा कि अपने भविष्य से जुड़े प्राय: सभी निर्णय वही ले रहे हैं, उस दिन वे स्वयं सही रास्ते पर आ जाएंगे, क्योंकि वे माओ को नहीं जानते। चंद सिरफिरे लोग यदि आदिवासियों की मासूमियत का फायदा उठा रहे हैं, तो दोषी हमारी व्यवस्था ही है।

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