मंगलवार, 22 नवंबर 2011

प्रधानमंत्री ने दिखाई है गजब की दृढ़ता




- राजेन्द्र चतुर्वेदी


प्रधानमंत्री ने बाली में अमेरिका व चीन, दोनों को बता दिया कि भारत अब झुकेगा नहीं। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ऐसी ही दृढ़ता जरूरी है।
शुक्रवार को इंडोनेशिया के बाली शहर में हमारे प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा और चीन के प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ से अलग-अलग मिले। उल्लेखनीय है कि बाली में इस समय एशियाई देशों के दो महत्वपूर्ण सम्मेलन चल रहे हैं। एक-पूर्वी एशिया के देशों के संगठन ईस्ट एशिया का, तो दूसरा दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के संगठन आसियान का। इन दोनों में भारत और चीन को तो खैर शामिल होना ही था, क्योंकि चीन जहां ईस्ट एशिया से जुड़ा हुआ है, तो वहीं भारत आसियान से। यह शायद पहली बार हुआ है, जब अमेरिका के राष्ट्रपति इन दोनों सम्मेलनों में पर्यवेक्षक की हैसियत से उपस्थित हैं। वहां से अब तक जो खबरें आई हैं, उनका निचोड़ यही है कि वह समय दूर नहीं, जब अमेरिका और चीन एक-दूसरे के आमने-सामने होंगे और दुनिया में विश्व युद्ध तो नहीं, पर वैसा ही शीतयुद्ध एक बार फिर छिड़ जाएगा, जैसा कभी अमेरिका और विघटित हो चुके सोवियत संघ के बीच लंबे समय तक छिड़ा रहा था।
निश्चित ही इसका प्रभाव हम पर भी पड़ेगा, पर फिलहाल तो हमारे प्रधानमंत्री ने बाली में बहुत दूरदर्शिता का परिचय दिया है। भारत और वियतनाम मिलकर दक्षिण चीन सागर में तेल और गैस खोजने की परियोजना पर काम कर रहे हैं, पर चीन को यह खोज नागवार गुजर रही है। जहां खोज चल रही है, वह समुद्री इलाका संयुक्त राष्ट्र संघ के चार्टर के मुताबिक वियतनाम का है, लेकिन चीन को चूंकि पड़ौसियों को दादागीरी दिखाने की आदत है। अत: बाली में उसने हमें धमकाया और इस परियोजना से कदम वापस खींचने के लिए कहा, पर मनमोहन सिंह ने वेन जियाबाओ को साफ-साफ शब्दों में बता दिया है कि परियोजना तो चलती रहेगी। देखना है कि इसके बाद चीन अब आगे क्या करता है?
इधर, हम से केवल चीन को ही दिक्कत नहीं है, अमेरिका को भी है। यह तो हमें पता ही है कि भारत-अमेरिका के बीच असैन्य परमाणु करार हो चुका है। अत: दुनियाभर की कंपनियां भारत में परमाणु ऊर्जा के संयंत्र लगाना चाहती हैं। इन कंपनियों को काबू में रखने के लिए हमारी संसद परमाणु जवाबदेही कानून पारित कर चुकी है, जिसमें दुघर्टना की स्थिति में कंपनियों से मुआवजा लेने का प्रावधान है। ओबामा चाहते हैं कि हम इस कानून में बदलाव करें, पर बाली में प्रधानमंत्री ने उन्हें भी बता दिया कि ऐसा नहीं हो सकता। मनमोहन सिंह की यह दृढ़ता काबिले-तारीफ है। उन्होंने अमेरिका व चीन, दोनों को बता दिया कि भारत झुकेगा नहीं।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें