रविवार, 13 नवंबर 2011

जल्दी ही बढऩे वाला है रेल किराया!


- राजेंद्र चतुर्वेदी


रेल मंत्री ने संकेत दे दिया है कि वे रेल किराया जल्दी ही बढ़ाने जा रहे हैं। जब रेलवे कंगाल हो चुका है, तो किराया तो अब बढ़ाया ही जाएगा।



रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी ने संकेत दे दिया है कि जल्दी ही रेल किराए में वृद्धि हो सकती है। उन्होंने कहा तो यह भी है कि वे यह कदम उठाने से पहले जनता के मन को टटोलेंगे कि वह चाहती क्या है? मगर, जो जनता चाहेगी, वही होगा भी, इसकी कोई गारंटी नहीं। दरअसल, रेलवे इन दिनों गहरे आर्थिक संकट में है। कहां तो उसके पास हजारों करोड़ रुपए की बचत हुआ करती थी, तो कहां अब स्थिति यहां तक आ पहुंची है कि उसके पास सितंबर के महीने में सिर्फ 75 लाख रुपए बचे थे। यह नवंबर का महीना है। जाहिर है कि अब रेलवे की बचत और भी कम हो गई होगी। इसके बाद रेल किराए को बढ़ाने के अलावा और कोई रास्ता भी तो नहीं बचता। रही बात जनता की मंशा जानने की, तो उसकी दुर्दशा भी किसी से छिपी नहीं है। पिछले छह-सात वर्षों में जनता के जीवनयापन के खर्चों में दौ सौ फीसदी से अधिक की वृद्धि हो चुकी है। उसको वर्ष-2006 के मुकाबले जीवनयापन की वस्तुओं के दाम लगभग तीन गुने अधिक चुकाने पड़ रहे हैं। अत: वह तो कहने से रही कि रेल मंत्री रेल किराया बढ़ा दें।
खैर, जनता और रेलवे, दोनों की दुर्दशा का कारण संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार की आर्थिक नीतियां हैं। सरकार को विकास दर के अलावा कुछ और दिख भी नहीं रहा है, इसलिए इस दर को बढ़ाने के लिए महंगाई कृत्रिम तरीके से बढ़ाई जा रही है। जनता का तो कोई नहीं, लेकिन कर्मचारी संगठित हैं। लिहाजा, उन्हें छठे वेतन आयोग का लाभ दे दिया गया, इस कारण रेलवे पर वेतन और पेंशन का बोझ बढ़कर लगभग दुगुना हो गया। फिर, रेलवे का राजनीतिक इस्तेमाल भी खूब होता है, इस कारण समय -समय पर किराया भी नहीं बढ़ाया गया और ऐसा करने वाले रेल मंत्रियों ने अपनी पीठ भी खूब थपथपाई है। अब जबकि हालात नियंत्रण से बाहर हो गए हैं, तो फिर किराया तो बढ़ेगा ही।

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