शनिवार, 17 दिसंबर 2011

पद के दुरुपयोग का आरोप बेहद संगीन

- राजेन्द्र चतुर्वेदी

गृह मंत्री पी. चिदंबरम पर पद के दुरुपयोग का आरोप लगा है। यदि आरोप सही है, तो उनके इस्तीफे की विपक्ष की मांग भी गलत नहीं है।
संसद में शुक्रवार को भी हंगामा होता रहा। हंगामे की वजह बने देश के गृह मंत्री पी. चिदंबरम। उल्लेखनीय है कि चिदंबरम को टूजी स्पेक्ट्रम घोटाले में तो पहले से ही 'लपेटाÓ जा रहा है। इसके लिए सुब्रमण्यम स्वामी ने बाकायदा अदालत का दरवाजा खटखटाया है और फिलहाल उनकी याचिका पर सीबीआई की विशेष अदालत में सुनवाई चल रही है व उसमें स्वामी चिदंबरम के खिलाफ गवाही देने को तैयार बैठे हैं। स्वामी पी. चिदंबरम के खिलाफ इतने पापड़ इसलिए बेल रहे हैं, क्योंकि आरटीआई के जरिए बाहर आए वित्त मंत्रालय के एक पत्र में उल्लेख है कि यदि चिदंबरम चाहते, तो टूजी घोटाला रोका जा सकता था। बहरहाल, इस कहानी का सार-संक्षेप यह है कि इस आरोप के कारण विपक्ष, खासतौर पर भाजपा संसद में चिदंबरम का बहिष्कार कर रही है। इधर, विपक्ष के हाथों में उनके खिलाफ एक और हथियार लग गया है और यह टूजी वाले हथियार से कहीं ज्यादा प्रहारक है।
पी. चिदंबरम पर आरोप है कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग किया है। यदि इस मामले की गहराई से पड़ताल करें, तो यह तथ्य सामने आता है कि एक व्यापारी पर जालसाजी का संगीन आरोप लगा था। उसका मामला अदालत में गया, तो वहां उसकी पैरवी वकील की हैसियत से पी. चिदंबरम ने की थी, वर्ष-1999 में। फिर, परिस्थितियां बदलीं, तो केंद्र में डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की सरकार बनी और चिदंबरम को उसमें वित्त मंत्री बनाया गया। 26 नवंबर-2008 को मुंबई में हुए भीषण आतंकवादी हमले के बाद परिस्थितियों ने एक मोड़ और लिया और चिदंबरम को देश के गृह मंत्रालय की कमान सौंपी गई तथा वे तब से अब तक गृह मंत्री के पद पर विराजमान हैं।
आरोप यह है कि गृह मंत्री की हैसियत से चिदंबरम ने अपने मुवक्किल के खिलाफ पंजीकृत मामला वापस लिया। यदि यह आरोप सही है, तो बेशक यह पद का दुरुपयोग ही है। आरोपी को जिस मामले में अदालत से भी राहत न मिली हो और हमारे गृह मंत्री कभी आरोपी के वकील रह चुके हों और बाद में उन्होंने अपने मुवक्किल के खिलाफ पंजीकृत मामला वापस ले लिया हो, तब उनकी भूमिका पर सवाल भी स्वाभाविक हैं और संसद में विपक्ष यही सवाल उठाकर चिदंबरम का इस्तीफा मांग रहा है। क्या विपक्ष की यह मांग गलत है? अब इस मामले में प्रधानमंत्री को स्वयं हस्तक्षेप करना चाहिए और यदि चिदंबरम ने सचमुच पद का दुरुपयोग किया है, तो उनका इस्तीफा भी लेना चाहिए।

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