मंगलवार, 10 जनवरी 2012

चीन से कठोरता से पेश आए भारत




- राजेन्द्र चतुर्वेदी

चीन में हमारे राजनयिक के साथ जो दुव्र्यवहार हुआ, वह चिंताजनक है। भारत जरा कड़ाई से पेश आए, ताकि ऐसी घटना फिर कभी न हो। चीन में भारतीय राजनयिक एस. बालाचंद्रन और उनसे भी पहले भारत के दो कारोबारियों, श्याम सुंदर अग्रवाल और दीपक रहेजा के साथ जो भी हुआ, वह चिंताजनक है।


मामला यह है कि ये दोनों व्यापारी यिबु (चीन का एक शहर) के कमोडिटी बाजार में यमन की कंपनी ग्लोबल ट्रेडिंग के साथ काम कर रहे थे। इस कंपनी के बारे में बताया जाता है कि वह चीन के कुछ व्यापारियों का पैसा खाकर भाग गई है। चूंकि हमारे व्यापारी इस कंपनी के साथ काम करते थे, इसलिए पहले तो चीनी व्यापारियों ने उन्हें बंधक बनाया और वे जो भी जुल्म उनके साथ कर सकते थे, वह किया, फिर हमारे इन व्यापारियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज हुआ और शंघाई की अदालत में इसी की सुनवाई चल रही थी। बालाचंद्रन इन्हीं व्यापारियों को छुड़ाने के लिए अदालत गए हुए थे, जहां चीनी व्यापारियों ने उनके साथ इतनी मारपीट की कि वे बेहोश हो गए और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
सही है कि मामला सामने आते ही भारतीय विदेश मंत्रालय ने जहां दिल्ली में मौजूद चीन के राजदूत को तलब कर लिया, तो वहीं चीन स्थित भारतीय दूतावास व वाणिज्य दूतावास ने चीनी-प्रशासन के समक्ष तगड़ी आपत्ति जताई। सही यह भी है कि चीन ने इस घटना की जांच कराने का वादा किया है, पर यह सब न तो उपयुक्त है, न ही पर्याप्त। उपयुक्त यह होता कि विरोध-स्वरूप हम चीन से अपना एकाध राजनयिक वापस बुलाते और पर्याप्त यह होता कि हम चीन से कड़ाई से पूछते कि वह हमारे राजनयिक को सुरक्षा देने और व्यापारियों का सम्मान बनाए रखने में सफल क्यों नहीं हुआ? मगर, हमारे एसएम कृष्णा तो कह रहे हैं कि यह व्यापार से जुड़ा हुआ मामला है और यह कानूनी ढंग से सुलझाया जाएगा। कृष्णाजी! इतने गंभीर मामले पर ऐसी मीठी भाषा बोलना चीन को बढ़ावा देना है, ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति के लिए।

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