मंगलवार, 10 जनवरी 2012

जनरल की जन्मतिथि पर विवाद होना गलत



- राजेन्द्र चतुर्वेदी

थलसेना प्रमुख की जन्मतिथि के मामले में जो विवाद हो रहा है, वह दुखद है। ऐसे मसले तो दरअसल बंद कमरे में सुलझाए जाने चाहिए।


थलसेना प्रमुख जनरल वीके सिंह की जन्मतिथि को लेकर जो विवाद चल रहा है, उसके सिलसिले में केंद्रीय कानून मंत्री सलमान खुर्शीद ने यदि अपने किसी साक्षात्कार में यह कहा है कि थलसेना प्रमुख कानून से ऊपर नहीं हैं, तो यह बात है तो सच ही, मगर फिर भी वह कही नहीं जानी चाहिए थी। दरअसल, यह एक ऐसा मुद्दा है, जिस पर किसी को कोई भी टीका-टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। भारतीय सेना बेहद अनुशासित है। उससे जुड़े किसी भी मुद्दे पर नेता लोग यदि वैसी बयानबाजी करने लगेंगे, जैसी वे अन्य मुद्दों पर करते हैं, तो इससे सेना के मनोबल पर तो बुरा प्रभाव पड़ेगा ही, इसके साथ ही दुनिया में हमारी सेना की साख भी प्रभावित होगी। मगर, इस तथ्य को शायद कोई याद ही नहीं रखना चाहता। हाल ही में थलसेना प्रमुख ने भी कहा था कि उनके साथ सरकार ऐसा व्यवहार कर रही है, जैसे वह भारत के नहीं, बल्कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख हों। फिर, इस मामले को तूल पकड़ाया पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने। उन्होंने रक्षा मंत्रालय को एक पत्र लिखा, जिसमें विवाद को सेना के मनोबल और जनरल सिंह की प्रतिष्ठा से जोड़ा गया।
अब सलमान खुर्शीद का बयान आ गया है, वह यदि उन्होंने सचमुच दिया है, तो इससे मामला और भी तूल पकड़ेगा। विवाद कुल मिलाकर इतना-सा है कि रक्षा मंत्रालय के रिकार्ड में जनरल वीके सिंह की जन्मतिथि 10 मई-1950 लिखी है, तो शैक्षिक रिकार्ड में 10 मई-1951 और जनरल सिंह चाहते हैं कि रक्षा मंत्रालय उनकी जन्मतिथि 10 मई-1951 माने। यह मनवाने के लिए वे सुप्रीम कोर्ट भी जा सकते हैं। यानी, जिस मुद्दे को बंद कमरे में सुलझाया जाना चाहिए था, उसको तूल दिया जा रहा है। जरूरत इस बात की है कि दोनों पक्ष संभल जाएं। जनरल सिंह अदालत न जाएं और सत्ताधीश बयानबाजी बंद करें।

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