मंगलवार, 3 जनवरी 2012

भारत को आर्थिक मंदी का कोई खतरा नहीं




राजेन्द्र चतुर्वेदी

जानकारों की मानें, तो नया वर्ष रोजगार के लाखों अवसर लेकर आया है। इसका अर्थ यह भी है कि भारत को मंदी का कोई खतरा नहीं।


देश-दुनिया की जितनी भी संस्थाएं हमारे रोजगारों की स्थिति, अर्थव्यवस्था और विकास पर नजर रखती हैं, उन सभी ने प्राय: एक स्वर में माना है कि वर्ष-2012 जहां शिक्षित बेरोजगारों के लिए नौकरी के नए अवसर लेकर आया है, तो वहीं नौकरी पेशा लोगों को यह वर्ष वेतन में बढ़ोतरी की सौगात भी प्रदान करेगा। ग्लोबल हंट नामक संस्था इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि 2012 में देश के विभिन्न सेक्टरों में पांच लाख नई नौकरियां पैदा होने की संभावना है। सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र पर नजर रखने वाली संस्था एलिक्सर कंसल्टिंग को तो यह भी लगता है कि तीन लाख से ज्यादा रोजगार के अवसर तो अकेले सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में ही पैदा होंगे। इधर, मैथ्यूज ग्रुप ने विनिर्माण क्षेत्र (रीयल इस्टेट सेक्टर) के बारे में घोषणा की है कि बीते वर्ष के मुकाबले चालू वर्ष में इस क्षेत्र में 40 फीसदी से ज्यादा की बढ़त आ सकती है, क्योंकि कई परियोजनाएं चालू वर्ष में पूरी हो जाएंगी, तो कई नई परियोजनाएं प्रारंभ होंगी। चूंकि इस वर्ष रिजर्व बैंक भी ब्याज दरें बढ़ाने की कोशिश नहीं करेगा, बल्कि उनमें गिरावट ही आएगी, इसीलिए मकान आदि खरीदने वालों की तादाद बढ़ेगी।



निश्चित ही यह सभी भविष्यवाणियां इस बात का ऐलान हैं कि भारत पर मंदी का असर नहीं पड़ेगा। मंदी के दौर में नौकरी करने वालों के वेतन नहीं बढ़ते हैं, बल्कि कइयों को अपनी नौकरी गंवानी पड़ती है। इस दौर में रोजगार के नए अवसर पैदा नहीं होते हैं, बल्कि बेरोजगारी बढ़ती है, पर अपने देश में नए वर्ष में इससे उल्टा होने जा रहा है, तो इसका मतलब यही है कि हमारी अर्थव्यवस्था पटरी पर है। वैसे तो दुनिया भर में भी मंदी आने की आशंका निरंतर कम होती जा रही है, पर भारत की बात कुछ अलग ही है। उम्मीद है कि यह सभी भविष्यवाणियां सही साबित होंगी और देश उन्नति की राह पर चलता रहेगा।

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