सोमवार, 23 जनवरी 2012

एक कठोर कानून की मांग तेज करे देश


- राजेन्द्र चतुर्वेदी

कलमाड़ी का जेल जाना और वहां नौ महीने तक रहना निश्चित ही एक बड़ी घटना है, मगर इससे भ्रष्टाचार पर रोक जरूर नहीं लग सकती है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने राष्ट्रमंडल खेल घोटाले के आरोपी सुरेश कलमाड़ी को गुरुवार को जमानत दे दी है। वे पिछले नौ महीने से तिहाड़ जेल में बंद थे। यह आजाद भारत के इतिहास का पहला मौका है, जब सत्तारूढ़ दल के एक जाने-माने राजनीतिज्ञ को नौ महीने जेल में गुजारने पड़े हैं और वह भी भ्रष्टाचार के आरोप में। वरना तो इस देश के अरबों रुपए भ्रष्टाचारियों की जेब में चले गए हैं और देश केवल जांचों के झांसों में ही उलझा रहा। आजाद भारत में पहला घोटाला हुआ था, रुस्तम सोहराब नागरवाला जीप कांड। यदि हम उसके आरोपियों को भूल जाएं, तो तब से अब तक देश में अनगिनत घोटाले हुए हैं और जिनके दाग राजनीतिज्ञों के दामन पर पड़े हैं, मगर जेल कोई नहीं गया, लंबे दिनों तक के लिए। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव भी चारा घोटाले में जेल गए थे और वे करीब एक महीने जेल में रहे भी थे, मगर उनके लिए सर्किट हाउस को जेल में तब्दील कर दिया गया था। यह सही है कि कुछ दिनों लालू को बेऊर जेल में भी बंद रहना पड़ा था, पर सच यह भी है कि लंबे समय तक जेल में रहने वाले सुरेश कलमाड़ी पहले कद्दावर राजनीतिज्ञ कहे जाएंगे। हां, अगर हम कद्दावर मान लें, तो टूजी स्पेक्ट्रम वाले ए. राजा जरूर उनसे आगे हैं, जो पिछले करीब 11 महीनों से जेल में पड़े हैं।
बहरहाल, कलमाड़ी का जेल जाना और वहां नौ महीने तक रहना निश्चित ही एक बड़ी घटना है, पर उल्लेखनीय यह भी है कि करोड़ों की कमाई के बाद कुछ महीने जेल में रहना भी पड़ता है, तो यह सौदा घाटे का नहीं है। हमें अपनी न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है कि यदि कलमाड़ी दोषी होंगे, तो उन्हें सजा भी मिलेगी, पर कितनी? मौजूदा कानून के हिसाब से ज्यादा से ज्यादा दो वर्ष की जेल और लाख-दो लाख का जुर्माना। तब हमें भ्रष्टाचारियों को कठोर सजा के लिए नए कानून की मांग भी करनी ही होगी।

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