गुरुवार, 2 फ़रवरी 2012

अल्पसंख्यक आरक्षण के कई आयाम हैं

- राजेन्द्र चतुर्वेदी

अल्पसंख्यकों को मिले 4.5 फीसदी आरक्षण का एक आयाम तो वोट की राजनीति से सीधा जुड़ा है, तो इसके कुछ आयाम और भी हैं।
केंद्र सरकार ने अल्पसंख्यकों को सरकारी नौकरियों व शिक्षा संस्थानों में जो साढ़े चार फीसदी आरक्षण एक जनवरी-2012 से देने का ऐलान किया है, उसको हम किस दृष्टिकोण से देखें? एक तो हमारा नजरिया यह हो सकता है कि डॉ. मनमोहन सिंह सरकार अल्पसंख्यकों पर बहुत मेहरबान है, इसलिए उसने हिंदू पिछड़ों के कोटे में से पिछड़े अल्पसंख्यकों को अलग आरक्षण दे ही दिया है। दूसरा नजरिया यह हो सकता है कि मंडल आयोग की जिस रिपोर्ट के आधार पर देश में पिछड़ों को आरक्षण दिया गया था, उसमें पिछड़ी जातियों के अल्पसंख्यक पहले से ही शामिल हंै, इसलिए केंद्र सरकार ने अल्पसंख्यकों को आरक्षण नहीं दिया, बल्कि उन्हें बरगलाया ही है और यह दूसरा नजरिया ज्यादा सही है।
दरअसल, पिछड़े अल्पसंख्यक आरक्षण का लाभ पहले से ही उठा रहे हैं। तब उनको मिले इस नए आरक्षण में नई बात केवल यही है कि अल्पसंख्यकों के लिए पिछड़ों के कोटे में से अलग कोटा कर दिया गया है। यह वही प्रयोग है, जो बिहार में नीतिश कुमार कर चुके हैं। उन्होंने अपने राज्य में पिछड़ों के आरक्षण को तीन श्रेणियों-पिछड़े, अति पिछड़े और पसमांदा मुसलमानों में बांट दिया है, तो दलित आरक्षण को दलित तथा महादलित श्रेणियों में। केंद्र और नीतिश के प्रयोग में एक अंतर भी है। जहां नीतिश सिर्फ पसमांदा मुसलमानों की बात करते हैं, तो वहीं केंद्र अल्पसंख्यकों की बात कर रहा है। इस फर्क के बावजूद अल्पसंख्यकों को मिल कुछ नहीं सका, बस दायें कान को बायें हाथ से पकडऩे की कला का प्रदर्शन मात्र किया गया है। दायां कान दायें हाथ की पकड़ में तो पहले से था यानी पिछड़े अल्पसंख्यकों को आरक्षण तो मिला ही था, अब बायें हाथ से दायां कान इसलिए पकड़ा गया है, ताकि अल्पसंख्यक देखें कि देखो, सरकार उनकी चिंता में किस कदर दुबली हुई जा रही है और यह वर्ग चुनाव में वोट दे दे।
इधर, केंद्र सरकार, खासतौर पर कांग्रेस पिछले पांच-छह वर्ष से जो भी करती है, उसमें भारतीय लोकतंत्र को द्विदलीय बनाने की कवायद भी देखी जा सकती है। अल्पसंख्यकों, खासतौर पर मुसलमानों को अपने पक्ष में लाने के लिए केंद्र सरकार जो भी करती है, उससे भाजपा को भी फायदा होता है, जबकि नुकसान होता है, क्षेत्रीय दलों का। अल्पसंख्यक आरक्षण का यह जो दांव खेला गया है, उससे भाजपा-कांग्रेस दोनों को फायदा है। कांग्रेस का अल्पसंख्यक कार्ड हिंदू वोटों को भाजपा के खेमे में स्वत: ले जाएगा। यानी, इस अल्पसंख्यक आरक्षण के कई आयाम हैं।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें