रविवार, 26 फ़रवरी 2012

पोलियो पर भारत की निर्णायक विजय




- राजेन्द्र चतुर्वेदी


अब हमारी धरती पर पहला कदम रखने वाले बच्चों को दो बूंद जिंदगी की नहीं पिलानी होगी। दरअसल, हम पोलियो से जंग जीत चुके हैं।भारत ने पोलियो से जंग आखिरकार जीत ही ली। चूंकि बीते एक वर्ष से हमारे देश में पोलियो का एक भी मामला सामने नहीं आया है, इसलिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने भी भारत को पोलियो मुक्त देश घोषित कर दिया है, जोकि हमारी एक बड़ी उपलब्धि है। उल्लेखनीय है कि पोलियो की बीमारी का एक मामला बीते वर्ष 13 जनवरी को पश्चिम बंगाल में सामने आया था और यह इस अभिशाप का अंतिम मामला था। यानी, पोलियो से हम जो जंग एक-सवा दशक से लड़ रहे थे, उसमें हमारी जीत तो एक वर्ष पहले ही हो चुकी थी। यह बात अलग है कि इसकी घोषणा अब की गई है। सही यह भी है कि डब्ल्यूएचओ किसी भी देश को पोलियो मुक्त तब घोषित करता है, जब उस देश में तीन वर्ष तक पोलियो का कोई मामला सामने नहीं आता। लिहाजा, अभी हम पर दो वर्ष तक और भी नजर रखी जाएगी, पर तथ्य यह भी है कि पोलियो का मामला सामने आने की आशंका पहले वर्ष में ज्यादा रहती है, फिर जैसे-जैसे समय गुजरता जाता है, आशंका भी कम होती जाती है और चूंकि हमारा पहला वर्ष बीत चुका है। अत: डब्ल्यूएचओ ने हमें पोलियो मुक्त घोषित कर दिया है।
बहरहाल, पोलियोमिलिटीज यानी पोलियो विषाणु के माध्यम से होने वाली एक ऐसी संक्रामक बीमारी है, जिसमें मानव शरीर के जो भी अंग (ज्यादातर हाथ-पैर) प्रभावित होते हैं, उन्हें लकवा मार जाता है। प्रदूषित पानी और भोजन के जरिए ये विषाणु पेट में चले जाते हैं और फिर स्नायुतंत्र पर हमला करते हैं। पांच वर्ष तक की उम्र में इसके संक्रमण की आशंका सबसे ज्यादा होती है। यह भी एक मुश्किल ही है कि इस बीमारी का कोई इलाज नहीं है, तो यह भी कि प्रारंभिक अवस्था में इस रोग की पहचान भी असंभव है। जब बच्चे इसकी चपेट में आ जाते हैं, तब ही पता चलता है कि उन्हें पोलियो हो गया है। यूं पोलियो की एक वैक्सीन तो वर्ष-1950 में ही तैयार कर ली गई थी, मगर डब्ल्यूएचओ ने पोलियो मुक्त दुनिया का सपना 1988 में पहली बार देखा था।
तमाम स्वयंसेवी संगठनों की मदद से उसका यह सपना अब साकार हो रहा है। भारत में जिन भी संस्थाओं ने पोलियो उन्मूलन के लिए काम किया, वे सब धन्यवाद की पात्र हैं। पोलियो मुक्त भारत उन्हीं के अथक परिश्रम का नतीजा है। यह सही है कि दुनिया के कुछ देश अब भी पोलियो से जंग लड़ रहे हैं, पर हम जंग जीत चुके हैं। अब हमारी धरती पर पहला कदम रखने वाले बच्चों को 'दो बूंद जिंदगी कीÓ पिलाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

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