गुरुवार, 16 फ़रवरी 2012

अभी युद्ध के आसार तो नहीं ही दिख रहे


- राजेन्द्र चतुर्वेदी

ईरान की उकसाने वाली कार्रवाइयों के बाद भी मध्य एशिया में अभी युद्ध के आसार नहीं लगते। ये कार्रवाइयां तो चुनाव की तैयारियां लगती हैं।


लगता है, महमूद अहमदीनेजाद के नेतृत्व में ईरान आत्मघात के रास्ते पर चल पड़ा है। दिल्ली, बैंकाक, जॉर्जिया में हुए आतंकी हमलों के आरोप से तो वह जूझ ही रहा था कि बुधवार को उसने एक और शरारत कर दी। उसने अपने ही देश में निर्मित परमाणु छड़ों (रॉड) को परमाणु रिएक्टर में न केवल लोड किया, बल्कि इसका ईरानी टेलीविजन पर सीधा प्रसारण भी किया। इस अवसर पर राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद ने ओजस्वी भाषण भी दिया है, जिसमें पश्चिम के देशों को ललकारा गया है। उन्होंने यूरोप के छह देशों को तेल की आपूर्ति रोकने की ईरान की तैयारी के बारे में भी दुनिया को बताया और कुल मिलाकर ईरान की इन कार्रवाइयों को उचित नहीं ठहराया जा सकता। जो गलत है, वह गलत है।
तर्क दिया जा सकता है कि जब अमेरिका के पास परमाणु बम हो सकते हैं, तो ईरान परमाणु से ऊर्जा क्यों नहीं बना सकता। यह तर्क अपनी जगह दुरुस्त है कि जब दुनिया में कई देशों के पास परमाणु बम हो सकते हैं, तो एकाध परमाणु बम यदि ईरान भी बना लेता है, तो इसमें गलत क्या है? मगर, गलत है, क्योंकि ईरान न तो धार्मिक विविधता को स्वीकार करता है, न ही मानव-अधिकारों को। फिर, उसकी नीति मध्य एशिया और अरब में खुद का वर्चस्व कायम करने की भी है। सालभर पहले विकीलीक्स के जो खुलासे हुए थे, उनमें बताया गया था कि ईरान की मंशा न केवल वर्चस्व बनाने की है, बल्कि वह सऊदी अरब की राजशाही भी खत्म करना चाहता है। यह भी हमें विकीलीक्स ने ही बताया था कि अरब देशों की जनता चाहे भले ही इस्रायल के खिलाफ हो, पर वहां की सत्ताएं चाहती हैं कि इस्रायल ईरान पर हमला करे। सही है कि अमेरिका भी वर्चस्ववादी है, पर वह लोगों को कम से कम धार्मिक आजादी तो देता है, जबकि ईरान धार्मिक आजादी-विरोधी है। उसका यह नजरिया सही नहीं कहा जा सकता।
सच यह भी है कि ईरान की इन कार्रवाइयों के बावजूद युद्ध अभी होने नहीं जा रहा। मार्च के महीने में ईरान में चुनाव है। अत: अहमदीनेजाद स्वयं को ज्यादा अमेरिका विरोधी इसीलिए दिखा रहे हैं, ताकि उन्हें अधिकतम वोट मिल सकें। लगभग इसी अवधि में रूस में राष्ट्रपति का चुनाव है, जहां ईरान के आका व्लादीमीर पुतिन का क्या होता है, यह भी पता नहीं। अगले वर्ष अमेरिका में भी चुनाव हैं और ओबामा प्रशासन नहीं चाहेगा कि वह चुनाव से पहले युद्ध में उतर जाए। यानी, अभी स्थिति युद्ध जैसी तो नहीं लगती है, पर हां, ईरान गलत रास्ते पर तो चल ही रहा है।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें