गुरुवार, 16 फ़रवरी 2012

भारत की दहलीज पर इस्रायल ईरान विवाद


- राजेन्द्र चतुर्वेदी

एक बम विस्फोट के बहाने इस्रायल और ईरान का विवाद भारत की दहलीज तक आ पहुंचा है। अब हमें बहुत समझदारी से काम लेना होगा।


सोमवार को दिल्ली में एक आतंकवादी बम विस्फोट हुआ, इसमें इस्रायली दूतावास की कार उड़ गई और कुल मिलाकर इस विस्फोट में चार लोग घायल हुए, जिनमें से एक घायल इस्रायली है। ऐसा ही एक बम विस्फोट करने की कोशिश जॉर्जिया में भी की गई, जोकि सफल नहीं हुई। बहरहाल, भारत ने जैसी आतंकी वारदातें भुगती हैं, यदि इसको उस नजरिए से देखें, तो यह इसके बाद भी बड़ी घटना नहीं है कि यह प्रधानमंत्री के आवास के पास और औरंगजेब रोड जैसे अति-सुरक्षित इलाके में हुई है। फिलहाल हमारी जांच एजेंसियां जांच कर रही हैं और हम कटु अनुभवों के आधार पर दावा कर सकते हैं कि यह जांच अनंतकाल तक होती रहेगी। जांच और खुफिया एजेंसियों का ढीलापन और हमारे देश में आतंकवाद पर होने वाली घृणित राजनीति कि किसके फोटो देख कौन रो पड़ा था, ही तो वह कारण है कि जॉर्जिया में जैसी वारदात विफल हो गई, वैसी ही वारदात भारत में सफल हो गई। वरना, इस घटना के होने का आखिर और क्या कारण है?
जो भी हो, मगर इस घटना का सबसे खतरनाक कोण यह है कि इसके बहाने इस्रायल और ईरान अब आमने-सामने आ सकते हैं। जॉर्जिया और दिल्ली की वारदातें सामने आने के बाद इस्रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बिना समय गंवाए इन दोनों ही घटनाओं की जिम्मेदारी यदि ईरान के मत्थे मढ़ दी है, तो यह यूं ही नहीं है। ऊर्जा के लिए परमाणु रिएक्टर बनाने में जुटा ईरान यूरोप, अमेरिका और इस्रायल के निशाने पर है। इस समय वह कठोरतम आर्थिक प्रतिबंध झेल रहा है और इसी वर्ष के जुलाई महीने से उस पर नए आर्थिक प्रतिबंध भी लग जाएंगे, तब वह अपना तेल भी दुनिया को नहीं बेच पाएगा। यानी, ईरान के साथ एक-एक कर वही सब किया जा रहा है, जो इराक और सद्दाम हुसैन के साथ किया गया था। चूंकि ईरान की सत्ता आए दिन इस्रायल को तबाह करने की धमकियां देती रहती है, इसलिए यह देश ज्यादा बेचैन है और वह ईरान पर हमले करने के बहाने ढूंढने में लगा है।
वैसे तो हमारी नजर इस पर भी होनी चाहिए कि इस मामले में कौन सही है, कौन गलत और जो सही हो, उसको अपना नैतिक समर्थन भी देना चाहिए। मगर, हमें इस पर खास ध्यान देना होगा कि इस्रायल व ईरान का विवाद हमारी दहलीज तक आ गया, एक बम विस्फोट के बहाने। अत: यह आगे नहीं बढऩा चाहिए, क्योंकि हमारे दोनों ही देशों से अच्छे रिश्ते हैं। यह विवाद आगे तब नहीं बढ़ेगा, जब इस घटना की जांच जरा जल्दी में होगी।


काले धन की वापसी को ईमानदार प्रयास जरूरी


विदेशों में जमा भारतीयों के काले धन का नया आंकड़ा सामने आया है। यह आंकड़ा चौंकाने वाला है। क्या जनता अब भी सोती ही रहेगी?

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के प्रमुख एपी सिंह ने कहा है कि विदेशी बैंकों में सबसे ज्यादा काला धन भारतीयों का ही जमा है और यह लगभग पांच सौ अरब डालर यानी 245 लाख करोड़ रुपए से भी अधिक हो सकता है। बहरहाल, जब से बाबा रामदेव ने काले धन के विरुद्ध अभियान छेड़ा है, तब से विदेशों में जमा भारतीयों के काले धन के तमाम आंकड़े आते रहे हैं। कोई कहता है कि विदेशों में भारतीयों के दो लाख करोड़ रुपए जमा हैं, तो कोई यह कि यह रकम 25 लाख करोड़ रुपए हो सकती है। बाबा रामदेव खुद अपने भाषणों में कहते हैं कि विदेशों में भारतीय लोगों के चालीस लाख करोड़ रुपए जमा हैं। मतलब, सीबीआई प्रमुख ने विदेशों में जमा जितनी धनराशि बताई है, वह अब तक बताई गई धनराशि में सबसे ज्यादा है। उन रामदेव के अनुमान से भी कहीं ज्यादा, जिनको कांग्रेस के कुछ नेता ढोंगी, लफ्फाज और न जाने कौन-कौन-से विशेषणों से विभूषित करते रहते हैं।
यह तो नहीं कहा जा सकता कि सीबीआई प्रमुख ने यह जो आंकड़ा बताया है, वह सही ही होगा। इसके बावजूद, यह तथ्य स्वयं सिद्ध होता है कि विदेशों में हमारा बहुत-सा धन जमा है, जो या तो कर चोरों ने जमा कराया है या फिर भ्रष्ट नेताओं, अफसरों ने। इस आंकड़े के बाद काले धन को वापस लाने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ेगी। यह सही है कि हमारे कुटिल राजनीतिज्ञों ने काले धन के मुद्दे को पांच राज्यों का चुनावी मुद्दा नहीं बनने दिया, पर सच यह भी है कि बाबा रामदेव अब भी अलख जगाते उत्तरप्रदेश भर में घूम रहे हैं। इससे उम्मीद की जानी चाहिए कि सरकार पर दबाव बनेगा और वह काले धन को वापस लाने के ईमानदार प्रयास करेगी, इस विषय पर राजनीति करने से बचेगी। फिर, यदि वह राजनीति करती ही है, तो जनता किस मर्ज की दवा है। जब तक जनता नहीं जागेगी, वह तब तक लुटती भी रहेगी।

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