बुधवार, 8 फ़रवरी 2012

आईपीएल ने किया है क्रिकेट का बंटाढार




- राजेन्द्र चतुर्वेदी

भारतीय खिलाडिय़ों का निराशाजनक प्रदर्शन, युवराज सिंह की बीमारी और बीसीसीआई को सहारा से मिला झटका, तीनों घटनाएं दुखद हैं।


एक ओर तो भारतीय टीम लगातार निराशाजनक प्रदर्शन कर रही है, तो दूसरी ओर युवराज सिंह कैंसर से पीडि़त हैं, तो तीसरी और क्रिकेट की दुनिया के सबसे धनी भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) को सहारा ने तगड़ा झटका दे दिया है। ये तीनों ही घटनाएं भारत के क्रिकेट के लिए किसी दुर्योग से कम नहीं हैं। उल्लेखनीय है कि सहारा बीसीसीआई से प्रायोजक की हैसियत से पिछले 11 वर्षों से जुड़ी हुई थी। बहरहाल, यदि हम भारत के क्रिकेट की इस दुर्दशा पर पैनी नजर डालें, तो इस पूरे मामले में खलनायक की भूमिका आईपीएल ने निभाई है। ट्वेंटी-20 क्रिकेट को जरूरत से ज्यादा दिया गया महत्व जहां हमारे खिलाडिय़ों पर भारी पड़ रहा है, क्योंकि सोने का अंडा देने वाली इस मुर्गी के चक्कर में पड़कर वे टेस्ट क्रिकेट की तकनीक प्राय: भूल ही गए हैं, तो वहीं आईपीएल में आपसी व्यावसायिक हितों में भी जमकर टकराव हुआ, उन लोगों के बीच, जो खिलाडिय़ों को खरीदकर टीमें बनाते हैं। लिहाजा, सहारा बीसीसीआई से दूर खड़ी हो गई है। सहारा इंडिया ने प्रायोजन के साथ ही साथ पुणे वारियर्स की फे्रंचाइजी से हाथ खींचने के अपने फैसले के पीछे बीसीसीआई के पक्षपाती रवैए को ही जिम्मेदार ठहराया है।
आखिर, सहारा को तो बीसीसीआई भाव तक नहीं देता, इधर मुंबई इंडियंस या चेन्नई सुपर किंग्स की गलत शर्तें भी मान लेता है, तो इसका कारण क्या है? कहीं इसका कारण यह तो नहीं है कि इंडियंस के मालिक मुंबई के एक ख्यात उद्योगपति हैं, जबकि सुपर किंग्स के मालिक स्वयं बीसीसीआई के मुखिया हैं। जो भी हो, पर फिलहाल सहारा बीसीसीआई से दूर है व यदि आईपीएल से पिंड नहीं छुड़ाया गया, तो क्रिकेट ध्वस्त हो जाएगा। रही बात युवराज सिंह की बीमारी की, तो कामना है कि वे जल्दी ही स्वस्थ हों और एक बार फिर देश को क्रिकेट खेलते नजर आएं।

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