गुरुवार, 16 फ़रवरी 2012

पाकिस्तान की हलचल पर दुनिया की नजर



- राजेन्द्र चतुर्वेदी

पाकिस्तान में गिलानी-प्रकरण को लेकर अलग हलचल मची है, तो कट्टरपंथियों की रैली के कारण अलग। देखना है कि आगे क्या होता है?


पाकिस्तान में आजकल बहुत कुछ ऐसा हो रहा है, जिस पर पूरी दुनिया की निगाहें हैं। जैसे-वहां के सुप्रीम कोर्ट ने प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी पर अदालत की अवमानना के आरोप तय कर दिए हैं, जिनका जवाब गिलानी 27 फरवरी को देंगे और इसीलिए दुनिया जानना चाहती है कि गिलानी का ऊंट आखिर किस करवट बैठता है? न्यायपालिका पद का बलिदान मांग रही है और दुनिया जानना चाहती है कि गिलानी अपने आका आसिफ अली जरदारी को बचाने के लिए अपना पद छोड़कर जेल जाने का जोखिम उठाएंगे या फिर आका को ही निपटा देंगे? गिलानी ने अदालत की अवमानना की ही जरदारी के लिए है। यदि वे जरदारी के खिलाफ चल रहे भ्रष्टाचार के सभी मुकदमे वापस नहीं लेते और इसको पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट अपनी अवमानना नहीं मानता, तो गिलानी की कुर्सी भी खतरे में नहीं पड़ती। फिलहाल, उनकी कुर्सी डोल रही है और वह बचती है या नहीं, इसका पता 27 फरवरी के बाद चलेगा। इसका भी कि गिलानी जेल जाते हैं अथवा नहीं।
ऐसा ही एक और कारण है, जिसकी वजह से भी दुनिया की नजरें पाकिस्तान पर जा टिकीं। रविवार को कराची में पाकिस्तान के चालीस कट्टरपंथी संगठनों ने एक बड़ी रैली आयोजित की, जिसमें एक स्वर में अमेरिका, इस्रायल और भारत को पाकिस्तान का शत्रु बताया गया। 26 नवंबर-2008 को मुंबई में हुए भीषण आतंकवादी हमलों का प्रमुख सूत्रधार हाफिज मोहम्मद सईद इस रैली में मुख्य वक्ताओं में से एक था। उसने कहा कि पाकिस्तान भारत को व्यापार के लिए तरजीही राष्ट्र का दर्जा देने के लिए व्यग्र है। यदि पाकिस्तान सरकार इसमें सफल हो गई, तो पाक भारत के लिए एक बाजार बन जाएगा। सईद ने रैली में उपस्थित भीड़ का आह्वान किया कि पाक को भारत का बाजार बनने से रोको।
दुनिया जानना चाहती है कि इस रैली पर पाकिस्तानी सरकार के क्या विचार हैं? मगर, अभी तक उसे कोई जानकारी नहीं मिल पाई है। पाकिस्तान की सरकार यूं चुप है, जैसे इस रैली में कुछ हुआ ही न हो। इधर, भारत सरकार भी चुप है। अभी तक उसने इस पर अपनी कोई अधिकृत प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की है, जबकि उसको चुप्पी तोडऩी चाहिए थी, क्योंकि पाकिस्तान के कट्टरपंथी हमें अमेरिका और इस्रायल का पिछलग्गू मान रहे हैं। बहरहाल, पाकिस्तान में हो रही हलचल पर पूरी दुनिया की नजर है व हमारी सरकार की भी होगी ही, पर हमें कुछ ज्यादा सतर्क इसलिए रहना होगा, क्योंकि पाकिस्तान हमारा पड़ौसी जो ठहरा।


सचमुच, वैज्ञानिकों की प्रतिभा लाजवाब है

अंग्रेज वैज्ञानिकों ने जो नया रोबोट बनाया है, उसे हम आधा-अधूरा मनुष्य कह सकते हैं, पर वह पूर्ण मनुष्य नहीं, क्योंकि मानव-जन्य है।


हॉलीवुड में ऐसी तमाम फिल्में बनती हैं, जिनमें मानव निर्मित यंत्र मनुष्यों को मात देने वाली कारगुजारियां करते दिखाए जाते हैं। भारत में बनी रोबोट, जिसमें प्रमुख भूमिका रजनीकांत ने निभाई थी, भी एक ऐसी ही फिल्म थी। इस फिल्म में रोबोट वह सब करता है, जिन कामों को एक जीवित इंसान कर सकता है। ऐसी फिल्मों को विज्ञान-कथा वाली फिल्में कहा जाता है, जोकि वैज्ञानिक आविष्कारों और फिल्म बनाने वालों की कल्पनाशीलता के कारण अस्तित्व में आती हैं। लगता है, ऐसी तमाम कल्पनाएं अब वास्तविकता में बदलने जा रही हैं। इंग्लैंड की ब्रिस्टल नाम की एक रोबोटिक प्रयोगशाला ने एक ऐसा रोबोट बनाने का दावा किया है, जोकि वह सब काम करता है, जिन पर अब तक हम मनुष्यों का एकाधिकार हुआ करता था। यह रोबोट चल और बोल सकता है, तो जैविक पदार्थों से ऊर्जा भी ग्रहण कर सकता है।
वैज्ञानिकों ने जो पहला रोबोट बनाया था, वह बेटरी से चलता था। फिर, जो दूसरा रोबोट अस्तित्व में आया, वह तो अपने लिए स्वयं ऊर्जा पैदा कर लेता था, जैविक कूड़े से विद्युत चालित एक सूक्ष्म यंत्र की मदद से। यह तीसरा रोबोट जैविक पदार्थों से ऊर्जा ग्रहण करता है व इस प्रक्रिया में उसके पेट में जो अपशिष्ट बचते हैं, उसमें उनको निकालकर बाहर करने की क्षमता भी है। मतलब, इसको हम आधा-अधूरा मनुष्य कह सकते हैं। हां, यह पूरा मनुष्य इसलिए नहीं है, क्योंकि उसे मनुष्य के इशारे पर ही चलना है, पर वैज्ञानिकों का दावा है कि वह जल्दी ही ऐसा रोबोट भी बनाएंगे, जो मनुष्य की तरह सोच-समझ सकेगा। हमें विश्वास करना होगा कि वैज्ञानिक कुछ भी करके दिखा सकते हैं। हमारे आसपास ऐसी कई चीजें हैं, जो हमें अचंभित करती हैं। इंटरनेट, मोबाइल, हवाई जहाज ऐसी ही वस्तुएं हैं, पर इन पर नियंत्रण हमारा ही है। यानी, नया रोबोट कैसा भी हो, वह भी हमारे नियंत्रण में ही रहेगा।

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