मंगलवार, 20 मार्च 2012

टाइम का यह निष्कर्ष गलत नहीं लगता





- राजेन्द्र चतुर्वेदी

टाइम का यह निष्कर्ष बहुत महत्वपूर्ण नहीं है कि मोदी 2014 में राहुल के लिए चुनौती बनेंगे, पर हां, यह निष्कर्ष गलत भी नहीं लगता है।


अमेरिका से प्रकाशित होने वाली विश्व की जानी-मानी पत्रिका 'टाइमÓ का दावा है कि वर्ष-2014 के लोकसभा चुनाव में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी कांग्रेस के महासचिव राहुल गांधी के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनने वाले हैं। वैसे टाइम ने यह साफ नहीं किया कि मोदी राहुल को प्रधानमंत्री पद पर पहुंचने से रोकेंगे या फिर सिर्फ चुनाव अभियान में ही चुनौती देंगे? फिर भी, टाइम का आकलन गलत नहीं लगता। दरअसल, राहुल गांधी उत्तर -प्रदेश विधानसभा चुनाव में अपनी कोई विशेष छाप नहीं छोड़ पाए हैं, जबकि नरेंद्र मोदी तो वहां प्रचार करने के लिए गए ही नहीं थे। यानी, राहुल गांधी और नरेंद्र मोदी की अभी सीधी भिड़ंत कहीं नहीं हुई, तो भी टाइम इस निष्कर्ष पर पहुंच गई है कि वर्ष-2014 में मोदी राहुल के लिए चुनौती बनेंगे, तो इसकी कोई ठोस वजह भी होगी। सवाल यह है कि वह वजह क्या हो सकती है?
यह सही है कि गुजरात में वर्ष-2002 में हुए दंगों को लेकर नरेंद्र मोदी की ओर तमाम उंगलियां उठाई जाती हैं और ऐसा भी नहीं है कि उंगलियां यूं ही उठाई जाती हैं। वास्तविकता यह है कि मोदी गुजरात के दंगों को रोक पाने में कामयाब नहीं हुए थे। इस तथ्य के बावजूद उनकी लोकप्रियता भी देशव्यापी है। एक ओर तो उनको हिंदुत्व का कट्टर चेहरा माना जाता है, तो दूसरी ओर मोदी की छवि विकास पुरुष की भी बन गई है, क्योंकि उनके शासन-काल में गुजरात का विकास हुआ है। जहां कानून-व्यवस्था के मामले में गुजरात देश का अव्वल राज्य बना हुआ है, तो वहीं यह तथ्य भी गौरतलब है कि मोदी या उनकी सरकार में शामिल किसी भी मंत्री पर भ्रष्टाचार का भी कोई आरोप नहीं है। यह बात अलग है कि उनके विरोधी उन पर राजनीतिक आरोप लगाते रहते हैं।
दूसरी तरफ राहुल गांधी हैं, जोकि देश के ज्वलंत सवालों पर कुछ भी नहीं बोलते। अत: यह समझ पाना मुश्किल है कि राहुल आखिर कैसी राजनीति करेंगे? राहुल गांधी यह तो चाहते हैं कि जनता कांग्रेस को वोट दे, पर क्यों दे? इसका उनके पास कोई ठोस तर्क नहीं होता। इस दृष्टि से देखें, तो राजनीतिक मोर्चे पर अब भी नरेंद्र मोदी राहुल गांधी से कहीं आगे दिखते हैं। इधर, इसी वर्ष दिसंबर के महीने में गुजरात विधानसभा के चुनाव भी होने हैं, जिनमें राहुल गांधी और नरेंद्र मोदी के बीच सीधी भिड़ंत होनी है, क्योंकि गुजरात में भी कांग्रेस के पास कोई स्थानीय कद्दावर नेता नहीं है। इन्हीं सब तथ्यों के आलोक में टाइम ने निष्कर्ष निकाला होगा कि राहुल की राह की बाधा हैं, मोदी और यह सही ही है।

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