मंगलवार, 27 मार्च 2012

रक्षा मंत्री की भूमिका पर सवाल ही सवाल





- राजेन्द्र चतुर्वेदी

बेशक, हमारे रक्षा मंत्री एके एंटनी ईमानदार नेता हैं, पर थलसेना प्रमुख के खुलासे के बाद कुछ सवालों के जवाब उन्हें देने ही चाहिए।


'बेचारीÓ केंद्र सरकार का हाल यह है कि वह एक मुसीबत से निकल भी नहीं पाती कि दूसरी में फंस जाती है। कोयला खदानों के आवंटन में हुए कथित घोटाले का शोरगुल अभी थमा भी नहीं था कि थलसेना प्रमुख जनरल वीके सिंह ने यह कहकर सनसनी फैला दी है कि उनको रिश्वत देने की पेशकश की गई थी। अंग्रेजी भाषा के एक अखबार में उनका साक्षात्कार प्रकाशित हुआ है और उसमें उन्होंने कहा है कि एक कंपनी की छह सौ घटिया गाडिय़ां खरीदने को हरी झंडी देने के एवज में उन्हें 14 सौ करोड़ रुपए की घूस देने का लालच दिया गया था। थलसेना प्रमुख ने यह भी कहा कि घूस की पेशकश करने वाला व्यक्ति सेना का एक पूर्व अधिकारी था, तो यह भी कि पेशकश करने वाले ने कहा था कि आपसे (जनरल वीके सिंह से) पहले भी यहां रिश्वत ली जाती रही है व आपके बाद भी ली जाएगी। जनरल वीके सिंह ने कहा है कि इसकी जानकारी उन्होंने रक्षा मंत्री एके एंटनी को दे दी थी, तो यह भी कि उनसे पहले इसी कंपनी की सात हजार घटिया गाडिय़ां भारतीय थलसेना महंगे दामों में खरीद भी चुकी थी।



बहरहाल, जनरल वीके सिंह ने यह जो कुछ भी कहा है, वह एक गंभीर मसला है। दरअसल, यह पूरा मामला देश की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। इसका संकेत साफ है कि भ्रष्टाचारी देश की सुरक्षा के साथ भी खिलवाड़ कर रहे हैं और यह भी कि सेना जैसे अति-महत्वपूर्ण संस्थान में भी भ्रष्टाचार का कीड़ा घुस गया है, जबकि रक्षा सौदों में दलाली के तमाम किस्से उजागर होने और सेना के एक-दो अफसरों के जमीन घोटाले में फंसने के बावजूद देश की जनता तो यही मानकर चलती है कि सेना में भ्रष्टाचार बिलकुल भी नहीं है। अब रक्षा मंत्री एके एंटनी से यह सवाल पूछा जाना चाहिए कि जब जनरल वीके सिंह ने रिश्वत की पेशकश के बारे में उन्हें बता ही दिया था, तो फिर वे चुप्पी साधकर तब तक क्यों बैठे रहे, जब तक कि जनरल ने भंडाफोड़ नहीं कर दिया?
बेशक, एके एंटनी एक ईमानदार व्यक्ति हैं, पर यह सवाल तो बनता है कि उनके सामने ऐसी कौन-सी मजबूरी थी कि न तो उन्होंने वीके सिंह को रिश्वत की पेशकश किए जाने के मामले को गंभीरता से लिया और न ही सात हजार गाडिय़ों की खरीद की जांच भी कराई? यह सही है कि जनरल के खुलासे के बाद इस प्रकरण की जांच करने के आदेश सीबीआई को दे दिए गए हैं, पर इससे उन सवालों का जवाब नहीं मिलता, जो जनरल के खुलासे के बाद देश की जनता के जिस्म पर चींटियों की तरह रेंग रहे हैं।

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