गुरुवार, 26 अप्रैल 2012

पाक में राजनीतिक भूचाल की आशंका

- राजेन्द्र चतुर्वेदी
पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने वहां के प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी को कोर्ट की अवमानना के मामले में दोषी मान लिया है। अब क्या होगा?
अब एक बार फिर पाकिस्तान की राजनीति में भूचाल आने की आशंका प्रबल-सी हो गई है। दरअसल, वहां के सुप्रीम कोर्ट ने प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी को अदालत की अवमानना का दोषी मान लिया है। अदालत ने गिलानी को निर्देश दिया था कि वे राष्ट्रपति आसिफ जरदारी के खिलाफ लगे भ्रष्टाचार के मामलों को फिर से खोलने के लिए स्विट्जरलैंड के बैंकों को पत्र लिखें। मगर, गिलानी ने कोर्ट का यह निर्देश नहीं माना था और इसका कारण यह बताया था कि कोई प्रधानमंत्री राष्ट्रपति के खिलाफ भला कैसे जांच करा सकता है? लिहाजा, इसी वर्ष जनवरी के महीने में उनके ऊपर अदालत की अवमानना का मामला दायर हुआ था। गुरुवार को पाक-सुप्रीम कोर्ट ने इसी पर अपना निर्णय सुनाया है। इससे सवाल यह उठ खड़ा हुआ है कि गिलानी क्या अपने पद पर बने रहेंगे या फिर उनको इस्तीफा देना पड़ेगा? यह सवाल इसलिए उठा है कि पाकिस्तान के संविधान के अनुच्छेद-63 (जी) के अनुसार कोई भी सजायाफ्ता व्यक्ति न तो नेशनल असेंबली का चुनाव लड़ सकता है, न ही सदन में रह भी सकता है। यानी, उसके चुनाव जीतने के बाद भी यदि अदालत उसे किसी मामले में सजा सुना देती है, तो उसकी सदस्यता शून्य हो जाती है। इस लिहाज से गिलानी की सदस्यता शून्य हो चुकी है। जब वे नेशनल असेंबली के सदस्य ही नहीं रहे, तब आखिर वह प्रधानमंत्री भी कैसे रह सकते हैं? मगर, मामला इतना सीधा नहीं है। पाकिस्तान का मीडिया कहने लगा है कि गिलानी अपने पद पर बने रहेंगे। तब हो यह सकता है कि पाक सरकार संविधान के अनुच्छेद-63 (जी) में संशोधन का प्रयास करे, ताकि गिलानी पद पर बने रहें, मगर दिक्कत यह है कि गिलानी सरकार के पास सदन में पूर्ण बहुमत नहीं है। वह दूसरे दलों के समर्थन पर टिकी हुई है। इसी कारण पाकिस्तान में उथल-पुथल मच सकती है।

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