मंगलवार, 3 अप्रैल 2012

सरकार को तेल कंपनियों की धमकी का अर्थ



- राजेन्द्र चतुर्वेदी

तेल कंपनियों से सरकार ने ही कहा होगा कि तुम हमें धमकाओ, ताकि हमें पेट्रोल के दाम बढ़ाने के लिए वाजिब तर्क मिल सके।


तेल कंपनियों द्वारा सरकार को दी गई इस धमकी का मतलब आखिर क्या है कि उन्हें पेट्रोल के दाम बढ़ाने की इजाजत अगर नहीं मिलेगी, तो वे पेट्रोल की आपूर्ति रोक देंगी? गौरतलब है कि अपने देश में तेल के कारोबार का निजीकरण तो हुआ है। मतलब, कुछ निजी तेल कंपनियां भी अंतरराष्ट्रीय बाजार से कच्चा तेल खरीदकर लाने लगी हैं। फिर भी, तेल का करीब 80 फीसदी तक कारोबार अब भी सरकारी कंपनियां ही करती हैं। ये कंपनियां तीन हैं-इंडियन आइल कॉरपोरेशन, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम। इन कंपनियों में निजी पूंजी भी नहीं लगी है। यानी, ये कंपनियां सौ फीसदी सरकारी हैं। तब, अगर सरकारी कंपनियां भी सरकार को धमकी देने लगें, तो कहा जाना चाहिए कि सरकार की बिल्ली, सरकार पर ही म्यांऊ करने लगी है। क्या ये कंपनियां यह जुर्रत कर भी सकती हैं, मगर यह जुर्रत की तो गई है और इसका तब कोई न कोई खास, कुछ विशेष कारण भी रहा होगा।
हम उस कारण की बात नहीं कर रहे हैं, जो ये कंपनियां बता रही हैं कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़ गए हैं। अत: इनको प्रतिदिन 48 करोड़ रुपए का घाटा हो रहा है। यह सही है कि कुछ ईरान के संकट के कारण, तो कुछ तेल उत्पादक देशों की नीतियों के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम वास्तव में बढ़ गए हैं। मगर, हमारी तेल कंपनियां भी कम जादुई नहीं हैं। इन्होंने यह कभी नहीं कहा कि अब उनका घाटा पूरा हो गया है। वे हमेशा घाटे में चलने का रोना रोती हैं और इसके बाद भी चलती जा रही हैं, दिवालिया नहीं हो रही हैं, तब इन्हें जादुई क्यों न माना जाए? उल्लेखनीय यह भी है कि जब चुनाव होते हैं, तब इन्हें घाटा नहीं होता। यदि कच्चे तेल के दाम 113 डालर प्रति बैरल हो जाने को पेट्रोल के दाम बढ़ाने का आधार बनाया जा रहा है, तब पेट्रोल के दाम जनवरी में ही बढ़ जाने चाहिए थे।
दरअसल, कच्चे तेल के दाम 113 डालर प्रति बैरल पर तो जनवरी के अंतिम सप्ताह में ही पहुंच गए थे, पर तब कंपनियों को घाटा नहीं हो रहा था, क्योंकि तब पांच राज्यों में चुनाव होने थे। अब घाटा सहा नहीं जा रहा है, क्योंकि चुनाव हो चुके हैं। घाटा तो इतना असहनीय हो चुका है कि कंपनियां सरकार को तक धमका रही हैं। इनकी इतनी हिम्मत नहीं हो सकती। सरकार ने ही कहा होगा कि तुम हमें धमकाओ, ताकि उसे एक तर्क मिल सके पट्रोल के दाम बढ़ाने का। इसके अलावा इस धमकी का कोई और अर्थ नहीं है। परदे के पीछे पेट्रोल के दाम बढ़ाने का खेल चल रहा है।

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