मंगलवार, 8 मई 2012

महंगाई व भ्रष्टाचार पर रोक लगाए कांग्रेस

- राजेन्द्र चतुर्वेदी
उत्तरप्रदेश में हार के लिए जिम्मेदार नेताओं को दंडित करने से ज्यादा बेहतर यह होगा कि अब कांग्रेस महंगाई और भ्रष्टाचार पर रोक लगाए।उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की हार के कारणों का पता लगाने के लिए रक्षा मंत्री एके एंटनी के नेतृत्व में गठित समिति की रिपोर्ट अब आ गई है और सुनने को मिल रहा है कि इस रिपोर्ट में जिन नेताओं को कठघरे में खड़ा किया गया है, अब उनके खिलाफ कार्रवाई भी होने ही वाली है। खैर, तीन सदस्यीय एंटनी समिति ने उत्तरप्रदेश में कांग्रेस की हार के चार मुख्य कारण बताए हैं-महंगाई, भ्रष्टाचार, टिकट वितरण में गड़बड़ी व नेताओं के अनर्गल बयान। बेशक, एंटनी समिति ने जो कारण बताए हैं, यूपी में कांग्रेस हारी भी उन्हीं के चलते है। मगर, कांग्रेस का जोर जिम्मेदार नेताओं को दंडित करने मात्र पर है, जबकि महंगाई और भ्रष्टाचार पर जब तक अंकुश नहीं लगाया जाता, यह नहीं माना जा सकता कि कांग्रेस ने अपनी हार के कारण वास्तव में दूर कर लिए हैं। यदि वह चाहती है कि आगे उत्तरप्रदेश जैसी स्थिति फिर न बने, तो इसके लिए जरूरी है कि केंद्र सरकार महंगाई बढ़ाने वाली आर्थिक नीतियों को त्यागकर महंगाई पर फौरन रोक लगाए तथा भ्रष्टाचार पर रोक के लिए एक ताकतवर लोकपाल विधेयक संसद के चालू सत्र में ही पारित कराए, जैसे संभव हो, तैसे। हार के लिए जिम्मेदार नेताओं को दंडित करने से कुछ नहीं होगा। कांग्रेस की नीतियां ही ऐसी हैं कि दंडित हुए नेताओं के स्थान पर जो पहुंचेगा, वही टिकट वितरण में भाई-भतीजावाद चलाएगा तथा अल्पसंख्यक तुष्टिकरण के लिए पहले 'ओसामाजीÓ जैसे शब्दों का प्रयोग करेगा, फिर अपने कहे से मुकर भी जाएगा। यह इसलिए कि तुष्टिकरण की राजनीति और परिवारवाद कांग्रेस के संस्कारों में शामिल हैं तथा दूसरे दलों में इन दुर्गुणों का संक्रमण उसी से हुआ है, क्योंकि देश की राजनीतिक संस्कृति इसी पार्टी ने ही विकसित की है। तब नेताओं को दंडित करने से होगा क्या? यानी, महंगाई और भ्रष्टाचार रोकने के प्रयास ज्यादा सही रहेंगे।

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