शुक्रवार, 11 मई 2012

एयर इंडिया को बर्बाद होने से बचाएं पायलट

- राजेन्द्र चतुर्वेदी
जिस एयर इंडिया के कर्मचारी निहायत ही गैर -जिम्मेदार हों, उसकी स्थिति कभी नहीं सुधर सकती। सरकार भी इस तथ्य को समझ ले।दिल्ली हाईकोर्ट ने एयर इंडिया के पायलटों की हड़ताल को अवैध घोषित कर दिया है, तो देश के नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने भी बीमार होने के बहाने हड़ताल पर गए पायलटों को बर्खास्त करने का सिलसिला प्रारंभ कर दिया है। मगर, ये सब वही टोटके हैं, जो पायलटों या फिर अन्य कर्मचारी संगठनों की हड़ताल होने के बाद आमतौर पर आजमाए जाते हैं। यह बात अलग है कि इस तरह के टोटकों से हड़तालियों की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ता। इसके बाद आमतौर पर होता यही है कि बाद में सरकार झुकती है, हड़तालियों को बातचीत के लिए बुलाती है और फिर उनकी मांगें मानकर या मांगें मान लेने का आश्वासन देकर हड़ताल खत्म करा देती है। देर-सबेर यह प्रक्रिया इस बार भी दोहराई जाएगी। मगर, तब तक एयर इंडिया के यात्री परेशान हो चुके होंगे और सार्वजनिक क्षेत्र की इस एकमात्र उड्डयन सेवा का करोड़ों रूपए का आर्थिक नुकसान हो चुका होगा। यह संस्था वैसे भी घाटे में चल रही है। उस पर करीब तीस हजार करोड़ का कर्जा है। सरकार भी इसको सात-आठ हजार करोड़ रुपए दे चुकी है, पर इस संस्था की आर्थिक सेहत दुरुस्त होने के कहीं कोई आसार नहीं दिख रहे हैं। ऐसे में एयर इंडिया के पायलटों की हड़ताल जितने दिन तक चलती रहेगी, उतना ही इसका नुकसान होगा। यहां सवाल यह है कि जब अंत में सरकार को ही झुकना है, तो वह जल्दी क्यों नहीं झुक जाती, ताकि एयर इंडिया का और नुकसान न हो? वैसे, इससे भी बेहतर यह होगा कि एयर इंडिया को लेकर अब कोई कठोर फैसला ले ही लिया जाए, क्योंकि एक तो यह संस्था सफेद हाथी बन गई है, तो दूसरे इसके कर्मचारी भी इस तथ्य को समझने के लिए तैयार नहीं दिखते। पायलटों की हड़ताल के यूं तो कई कारण हैं, लेकिन इसका जो एक प्रमुख कारण है, वह बहुत हास्यास्पद है। उल्लेखनीय है कि बहुत पहले ही सरकारी क्षेत्र की एक और विमानन सेवा इंडियन एयर लाइंस का एयर इंडिया में ही विलय हो चुका है। तभी से एयर इंडिया के पायलटों को शिकायत है कि इंडियन एयर लाइंस के पायलटों को उनकी बराबरी का दर्जा क्यों दे दिया गया? क्या यह शिकायत वाजिब है? जिस संस्था के पायलट इस तरह की गुटबाजी में फंसे हों, उन्हें अपने संस्थान की चिंता न हो, उनकी हड़ताल पर कैसा ताज्जुब? आश्चर्य की बात तो यह है कि सरकार इस संस्था को तीस हजार करोड़ का पैकेज देने को भी तैयार है, तो क्यों? जब कर्मचारी गैर-जिम्मेदार हैं, तो पैकेज के बाद भी एयर इंडिया के हालात नहीं सुधरेंगे।

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