शुक्रवार, 11 मई 2012

पायलट की सूझबूझ की सराहना करें

- राजेन्द्र चतुर्वेदी
पायलट की सूझबूझ से झारखंड के मुख्यमंत्री समेत छह और लोगों की भी जानें बच गईं, पर यह हेलीकॉप्टर दुर्घटना आखिर हुई, तो क्यों?झारखंड के मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा का हेलीकॉप्टर बीते रोज रांची हवाई अड्डे पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस दुर्घटना में मुंडा व उनकी पत्नी समेत छह लोग बाल-बाल बचे हैं। फिलहाल, इस हादसे ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। दरअसल, यह हादसा उस समय हुआ है, जब मौसम में कोई खराबी नहीं थी। यानी, हादसा इस बात की सूचना दे रहा है कि उड़ान में किसी न किसी स्तर पर जरूर कोई लापरवाही बरती गई। अलबत्ता, पायलट की सूझबूझ जरूर सराहनीय है, वरना कुछ भी हो सकता था। उड़ान के दौरान ही उसने अनुमान लगा लिया था कि हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त होने की कगार पर पहुंच गया है। उसने हेलीकॉप्टर को उतारने का भी प्रयास किया, कुचाई नामक एक गांव में, पर वह इसमें सफल न हो सका। तब उसने फौरन फैसला कर लिया कि हेलीकॉप्टर को रांची हवाई अड्डे पर ले जाना है। इतना ही नहीं, उसने तब तक हेलीकॉप्टर को आसमान में ही रहने दिया, जब तक कि उसका ईंधन खत्म नहीं हुआ, क्योंकि अगर ईंधन से भरा हुआ हेलीकॉप्टर गिर जाता, तो उसमें आग भी लग जाती और तब दुर्घटना कितनी भयानक होती, हम इसकी सिर्फ कल्पना ही कर सकते हैं। मगर, इधर ईंधन खत्म होने को हुआ और उधर पायलट ने उसे उतारने की कोशिश की। लिहाजा, हेलीकॉप्टर सिर्फ 25 मीटर की ऊंचाई से ही जमीन पर गिरा। इससे सवारियों को चोटें तो आईं, पर वे ठीक हो जाएंगी। यदि पायलट इतनी सूझबूझ नहीं दिखाता, तो क्या होता? खैर, अब जरूरत इस बात की है कि इस हादसे के कारणों का पता लगाया ही जाए। आखिर, ऐसा हेलीकॉप्टर एक मुख्यमंत्री को लेकर उड़ा ही क्यों, जिसके रख-रखाव पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया था? एक और सवाल, जब विशिष्ट लोगों की जान को भी दांव पर लगा दिया जाता है, तब आम जनता अपनी सुरक्षा की आशा इस व्यवस्था से आखिर कैसे करे?

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