मंगलवार, 12 जून 2012

बढ़ती आबादी के कारण संकट में है धरती



- राजेन्द्र चतुर्वेदी





चाहे तो बात हम पर्यावरण की करें या धरती के बेरहमी से दोहन की, इन दोनों समस्याओं की जड़ जनसंख्या वृद्धि है। तब इसे ही रोकना होगा।विज्ञान पत्रिका 'नेचरÓ में जो लेख प्रकाशित हुआ है, उसके विषय में हम यह तो मान सकते हैं कि लेख में नमक-मिर्च कुछ ज्यादा लगाया गया है, पर उसमें धरती और पर्यावरण को लेकर जो आशंकाएं प्रकट की गई हैं, उन्हें कोई पूरी तरह से खारिज नहीं कर सकता। लेख का निचोड़ यह है कि बढ़ती हुई जनसंख्या धरती के अस्तित्व के लिए खतरा बन गई है, क्योंकि उसकी जरूरतों को पूरा करने के लिए जल, जंगल और जमीन का बेरहमी से दोहन किया जा रहा है। यह निष्कर्ष भी किसी ऐसे-वैसे व्यक्ति ने नहीं निकाला, बल्कि यूनिवर्सिटी ऑफ कैलीफोर्निया के पर्यावरणविद् एंथनी बारनोस्की ने निकाला है और इसके लिए उन्होंने जो शोध किया, उसमें यूरोप के देशों समेत अमेरिका-कनाडा आदि के कुल 17 वैज्ञानिक शामिल थे। यानी, यह भविष्यवाणी काफी वजनदार लगती है कि जनसंख्या-वृद्धि के कारण धरती संकट में है।
तब दुनिया को दो मोर्चों पर एक साथ काम करना होगा। एक तो यही कि पर्यावरण संरक्षण के ईमानदार प्रयास किए जाएं, धरती का जो बेरहमी से दोहन किया जा रहा है, उसको रोका जाए और दूसरा यह कि जिन देशों में जनसंख्या वृद्धि की रफ्तार बहुत तेज है, उनके द्वारा उसे रोकने के ठोस प्रयास किए जाएं। जनसंख्या वृद्धि की रफ्तार पर जब हम नजर डालते हैं, तो पाते हैं कि एशिया में यह भारत में सबसे ज्यादा है। फिर, नंबर इंडोनेशिया, मलेशिया और पाकिस्तान का आता है। बात एशिया के अलावा शेष दुनिया की यदि की जाए, तो जनसंख्या वृद्धि के मामले में अफ्रीका और अरब के देश भी पीछे नहीं हैं। यूरोप के देशों में आबादी बढऩे की दर काफी कम है, तो फ्रांस में तो यह नकारात्मक भी है। चीन ने भी इधर अपनी आबादी की रफ्तार पर काबू पा लिया है।
वैसे तो यह समस्या उन्हीं देशों की है, जहां की जनसंख्या बढ़ रही है, पर दुनिया भी इससे अपनी आंखें नहीं मूंद सकती। विश्व स्वास्थ्य संगठन जैसी संस्थाओं को चाहिए कि वे आगे आएं और आबादी पर नियंत्रण के ठोस प्रयास करें, पर फिलहाल तो दुनिया में ऐसी कोई संस्था नहीं, जो यह काम करती हो। हैं कुछ संस्थाएं, मगर ये जनसंख्या नियंत्रण के लिए प्रयास नहीं करतीं, बल्कि यही बताती हैं कि किस देश में कितनी आबादी बढ़ रही है। ठीक इसी तरह धरती के दोहन को रोकने के लिए भी कोई संस्था नहीं। हां, पर्यावरण संतुलन कायम रखने के लिए कई संस्थाएं जरूर प्रयास करती हैं, पर यह मामला भी जनसंख्या से सीधा जुड़ा है। तब यही जरूरी है कि दुनिया जनसंख्या वृद्धि को ज्यादा गंभीरता से ले।

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