मंगलवार, 3 जुलाई 2012

कलाम की किताब पर राजनीति प्रारंभ



- राजेन्द्र चतुर्वेदी



डॉ. कलाम की किताब अभी आई नहीं, मगर उस पर राजनीति होने लगी है। नेता अपनी सुविधा के अनुसार उसकी व्याख्या करने में लग गए हैं।पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की किताब 'टर्निंग प्वाइंटÓ ने देश की राजनीति में मानो भूचाल-सा ला दिया है। वैसे तो उस किताब में ऐसा कुछ भी नहीं, जिसके आधार पर गड़े मुर्दे उखाड़े जाएं। दरअसल, किसी भी व्यक्ति की किताब उसके निजी अनुभवों से भरी हुई होती है। तब हमारे लिए किताब का मतलब सिर्फ यह होना चाहिए कि उसे एक पाठक की हैसियत से पढ़ें व उसमें हमारे लिए यदि कोई सबक निहित हो, तो उसे ग्रहण करें, न हो, तो बात खत्म। मगर, हमारे राजनीतिज्ञ भूचाल लाने की कला में बहुत माहिर हैं। वे ऐसा इसलिए करते हैं, ताकि आम जनता का ध्यान असली मुद्दों से हटाया जा सके। डॉ. कलाम की किताब के बहाने भी यही सब हो रहा है। मजेदार बात यह भी है कि उस पर समग्रता से कोई चर्चा भी नहीं हो रही है। बस, लोगों ने अपनी -अपनी सुविधा के हिसाब से किताब के अलग-अलग अंशों को पकड़ लिया है और उन्हीं के आधार पर खुद को सही और दूसरों को गलत सिद्ध करने की कुचेष्टाएं भी प्रारंभ कर दी हैं।
मसलन-बताया जा रहा है कि किताब में आया है कि सोनिया गांधी यदि वर्ष-2004 के आम चुनाव के बाद प्रधानमंत्री बनना चाहतीं, तो राष्ट्रपति की हैसियत से कलाम उन्हें रोक नहीं सकते थे, मगर सोनिया गांधी ने डॉ. मनमोहन सिंह का नाम आगे बढ़ाया था। यह अंश कांग्रेस के लिए सुविधाजनक है, इसलिए वह इसी पर सबसे ज्यादा चर्चा कर रही है, क्योंकि इसके जरिए उसे अपनी नेता को एक बार फिर त्यागी साबित करने का अवसर जो मिल गया है। उसके लिए दूसरा अंश वह सुविधाजनक है, जिसके बारे में कहा जा रहा है कि कलाम ने लिखा है कि दंगों के बाद तब के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी चाहते थे कि कलाम गुजरात न जाएं। इस अंश के आधार पर भाजपा को सांप्रदायिक ठहराया जा सकता है, लिहाजा कांग्रेस नेता इस पर भी चर्चा कर रहे हैं।
जबकि, भाजपा के लिए जो मुफीद है, वह किताब का दूसरा अंश है। बताया जा रहा है कि किताब में लिखा है कि 2005 में जब बिहार विधानसभा को भंग करने के केंद्र सरकार के निर्णय को सुप्रीम कोर्ट ने असंवैधानिक ठहरा दिया था, तब कलाम ने राष्ट्रपति पद त्यागने का मन बना लिया था और तब प्रधानमंत्री ने रोका था कि वे ऐसा न करें, वरना सरकार गिर जाएगी। भाजपा को यही अंश सबसे ज्यादा पसंद है, क्योंकि इससे सिद्ध होता है कि कांग्रेस असंवैधानिक निर्णय लेती है। बहरहाल, यह सब गलत है, पर हो रहा है। कलाम की किताब पर विवाद नहीं होना चाहिए।

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