गुरुवार, 5 जुलाई 2012

रंग लाता लग रहा है वैज्ञानिकों का श्रम



- राजेन्द्र चतुर्वेदी


सर्न के वैज्ञानिकों द्वारा खोजा गया कण यदि हिग्स बोसोन है, तो ब्रह्मांड के कई रहस्यों पर से पर्दा उठ जाएगा और यदि नहीं है, तो...?खैर, अभी यह कहना तो मुनासिब नहीं है कि जो कण (अणु) बुधवार को वैज्ञानिकों ने खोज निकाला है, वह हिग्स बोसोन यानी गॉड पार्टीकल ही है। जब जिनेवा (स्विट्जरलैंड) में 175 मीटर नीचे जमीन के अंदर बनी सर्न (यूरोपीयन ऑर्गनाइजेशन फॉर न्यूक्लियर रिसर्च) की प्रयोगशाला के वह वैज्ञानिक, जो अब तक के इस सबसे बड़े भौतिक प्रयोग में पिछले चार वर्ष से लगे हुए थे, खुद कह रहे हैं कि जो कण उन्होंने खोजा है, वह हिग्स बोसोन से मिलता-जुलता है। यानी, वह हिग्स बोसोन ही है, वे ऐसा दावा करने से बच रहे हैं, तब इस विषय में किसी निष्कर्ष पर पहुंचना अभी उचित नहीं है। प्रयोग से प्राप्त नतीजों का विश्लेषण होने के बाद वैज्ञानिक स्वयं बता देंगे कि उन्होंने हिग्स बोसोन खोज लिया है या नहीं। मगर, जो कण मिला है, वह भी तो महत्वपूर्ण है।
दरअसल, भौतिक विज्ञान बीती एक सदी से भी ज्यादा समय से इस सिद्धांत (थ्योरी) पर काम कर रहा है कि परमाणु न्यूट्रॉन व प्रोटॉन नामक कणों के मेल से बना है व परमाणु में शामिल सभी प्रोटॉन एक जैसे होते हैं, तो सभी न्यूट्रॉन भी। 1924 में भारतीय भौतिक विज्ञानी सत्येंद्र नाथ बोस ने तमाम प्रयोगों के बाद दुनिया को बताया कि प्रोटॉन एक जैसे नहीं होते। अल्बर्ट आइंस्टीन ने यही सब न्यूट्रॉन के बारे में कहा। बोस के सिद्धांत पर पीटर हिग्स आगे बढ़े और 1960 में वे इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि प्रोटॉन भी कई छोटे-छोटे कणों से मिलकर बना है। इन कणों के आपस में टकराने से ही यह ब्रह्मांड अस्तित्व में आया है। इसी को बिग बैंग थ्योरी कहा जाता है। इस थ्योरी पर काम तो बहुत से वैज्ञानिकों ने किया, बिग बैंग थ्योरी को आगे बढ़ाया, मगर प्रोटॉन के कणों को खोजने का काम सत्येंद्र नाथ बोस और पीटर हिग्स ने किया था। अत: इसे नाम दिया गया हिग्स बोसोन। चूंकि यही कण ब्रह्मांड की रचना का कारण माना गया, इसीलिए कुछ वैज्ञानिक इसी कण को गॉड पार्टीकल यानी भगवान का अंश भी कहने लगे।
यदि सर्न के वैज्ञानिकों ने बुधवार को इसी कण को खोजा है, तो निकट भविष्य में ब्रह्मांड के बहुत से रहस्यों पर से पर्दा उठ ही जाएगा। मगर, यदि यह कण नहीं खोजा जा सका है, तो भौतिक-शास्त्र को अपने बहुत सारे सिद्धांत बदलने पड़ेंगे। खास तौर पर ब्रह्मांड संबंधी वे सिद्धांत, जो बिग बैंग थ्योरी के आधार पर बनाए गए हैं। मतलब, जो कण बुधवार को खोजा गया है, यदि वह गॉड पार्टीकल नहीं है, तो भौतिक-शास्त्र की धारा बदल जाएगी और यदि गॉड पार्टीकल है, तो ब्रह्मांड को जानने का मौका मिलेगा।

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