सोमवार, 16 जुलाई 2012

शेट्टार कब तक रहेंगे येद्दि के करीबी?


- राजेन्द्र चतुर्वेदी


येद्दियुरप्पा तब तक उठापटक करते रहेंगे, जब तक वे खुद कर्नाटक के मुख्यमंत्री नहीं बनते। दरअसल, वह भाजपा की कमजोरी जानते हैं।जब कोई राजनीतिक पार्टी सत्ता के लिए तमाम समझौते करने लगती है, तो 'तमाशाÓ भी वैसा ही होता है, जैसा कर्नाटक-भाजपा में हो रहा है। इस तमाशे का एक और आयाम यह है कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री सदानंद गौड़ा ने अपना इस्तीफा दे दिया है और अब जगदीश शेट्टार वहां के नए मुख्यमंत्री होंगे। यह कहना समस्या का सरलीकरण करना ही है कि भाजपा भी आखिर क्या करे? जब पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येद्दियुरप्पा वहां की सरकार को चलने ही नहीं दे रहे थे, वे अपने समर्थक मंत्रियों का इस्तीफा दिलाकर पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व पर दबाव बनाए हुए थे कि सदानंद को हटाओ और उनके करीबी जगदीश शेट्टार को मुख्यमंत्री बनाओ, तब इस पार्टी के सामने रास्ता ही क्या बचता था? यह असली सवाल नहीं हैं, जो इस प्रकरण से उठ रहे हैं, बल्कि असली सवाल तो यह है कि देश की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी यानी भाजपा कर्नाटक में एक व्यक्ति यानी येद्दियुरप्पा की बंधक बनी कैसे? यह स्थिति कैसे बनी कि येद्दि जिसके सिर पर हाथ रख दें, वह व्यक्ति मुख्यमंत्री बना दिया जाए और जिसकी ओर भी उनकी नजर तिरछी हो जाए, उसे चलता कर दिया जाए? क्या यह 'दास-भावÓ नहीं है?
है और यह भाव तब पैदा होता है, जब कोई राजनीतिक दल मान ले कि उसके लिए सत्ता ही सब कुछ है। भाजपा येद्दियुरप्पा के सामने इसीलिए तो साष्टांग हो जाती है, क्योंकि वह जनती है कि लिंगायत समुदाय का यह नेता यदि उससे दूर हो गया, तो फिर कर्नाटक में उसका जनाधार नहीं बचेगा। येद्दियुरप्पा भी भाजपा की इस कमजोरी को जानते हैं कि कर्नाटक में चूंकि वह उनकी ही जाति के वोटों पर निर्भर है, इसलिए जैसा वे कहेंगे, वह बिलकुल वैसा ही करेगी भी। जिस समय भ्रष्टाचार के आरोप लगने के बाद भी येद्दियुरप्पा मुख्यमंत्री का पद छोडऩे के लिए तैयार नहीं हो रहे थे, उसी समय भाजपा ने यदि उन्हें यह स्पष्ट संकेत दे दिया होता कि सत्ता रहे या जाए, मगर आपको मुख्यमंत्री पद पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, तो यह तमाशा भी तभी खत्म हो गया होता।
संभव था कि इससे कर्नाटक में भाजपा को नुकसान हो जाता, यह भी कि कर्नाटक में भाजपा की सत्ता नहीं रहती, पर इससे उसे देश में बहुत फायदा होता। देश में संदेश जाता कि भाजपा मूल्यों की राजनीति करती है, पर उसने तो येद्दियुरप्पा को भस्मासुर बना दिया है। लिहाजा, अभी तमाशा और होगा, क्योंकि येद्दि तब तक उठापटक करते रहेंगे, जब तक खुद मुख्यमंत्री नहीं बनते। यानी, नहीं माना जा सकता कि कर्नाटक का नाटक खत्म हो गया।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें