सोमवार, 16 जुलाई 2012

खुर्शीद ने फोड़ दिया है मीडिया के सिर ठीकरा



- राजेन्द्र चतुर्वेदी



सलमान खुर्शीद ने पहले तो कांग्रेस के संबंध में कई बातें कहीं, फिर वे मुकर भी गए, जबकि जो भी उन्होंने कहा था, वो कांग्रेस के हित में ही था।अपने देश में यह चलन आम है कि पहले तो राजनीतिज्ञ बड़ी -बड़ी बातें करते हैं, जो कहते हैं, उसमें सिद्धांतों और नीतियों का तड़का लगाते हैं और फिर जब फंस जाते हैं, तो ठीकरा मीडिया के सिर फोड़ देते हैं कि उनके बयान को मीडिया द्वारा तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है, इसीलिए गलत-फहमी पैदा हो गई है। देश के कानून मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद ने भी अबकी बार यही किया है। गौरतलब है कि अंग्रेजी भाषा के एक अखबार को साक्षात्कार देते हुए सलमान खुर्शीद ने कहा था कि कांग्रेस दिशाहीन है और इसका कारण उन्होंने यह बताया था कि राहुल गांधी पार्टी को दिशा नहीं दे पा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि 1990 में कांग्रेस में एक नई विचारधारा का उदय हुआ था और इसीलिए देश ने उसे स्वीकार कर लिया था। वैसी ही नई व रचनात्मक विचारधारा की जरूरत फिर से है और चूंकि कांग्रेस के पास राहुल गांधी का कोई विकल्प नहीं है, पार्टी में वे दूसरे नंबर के नेता हैं, इसलिए यह काम उनको ही करना चाहिए, पर अभी तो वे कोई जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार ही नहीं दिख रहे हैं।
बहरहाल, अब जबकि सलमान खुर्शीद अपने इस बयान से मुकर गए हैं, तो हम भी मान लेते हैं कि उन्होंने ऐसा कुछ कहा ही नहीं होगा। मगर, सवाल यह है कि अगर उन्होंने ऐसा कहा भी है, तो इसमें क्या गलत है? देश को यह पता अब तक नहीं चला है कि आखिर राहुल गांधी अपनी पार्टी को कैसा बनाना चाहते हैं व आधुनिक भारत के संबंध में उनकी परिकल्पना क्या है? सलमान खुर्शीद ने यही सब तो कहा था, तो क्या जरूरत थी कि पार्टी इस पर उनसे सफाई मांगती? फिर, पार्टी ने यदि सफाई मांग ही ली, तो खुर्शीद को अपनी बात पर कायम रहना चाहिए था, इससे पार्टी में मंथन शुरू होता और वह मजबूत बनती। मगर, इधर तो कहानी ही अलग हो गई है। ठीकरा मीडिया के सिर फोड़ दिया गया है।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें